गोदावरी — बिमला रावत ऋषिकेश उत्तराखण्ड

गोदावरी गाँव में रहने वाली एक साधारण सी घरेलू महिला थी जिसका विवाह 20वर्ष की अवस्था में हो गया था l समय के साथ वह जल्दी ही तीन बच्चों की माँ बन गईं l उसके सुखमय जीवन संसार को अचानक जैसे किसी की नजर लग गईं l एक सड़क हादसे में उसके पति की मृत्यु हो गईं l गोदावरी के ऊपर जैसे मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा l अब उसके सामने अपने बूढ़े सास ससुर और तीन छोटे छोटे नादान बच्चों की जिम्मेदारी थी l उसने स्वयं को हिम्मत दी और खेती -बाड़ी कर अपना गुजारा करने लगी l इसी बीच विद्यालय में चलने वाली “मिड डे मील” योजना के अन्तर्गत उसका चयन भोजन माता के लिए हो गया l समय पंख लगाकर उड़ने लगा और उसके तीनों बच्चे भी बड़े हो गए बड़ा बेटा विवाह योग्य हो गया था l अब गोदावरी बेटे के लिए बहू खोज
रही थी l गोदावरी की छोटी बहिन ने एक लड़की के बारे में बताया कि एक अच्छी लड़की मेरी नजर में है लेकिन वह विधवा है अभी छः महीने पहले ही उसका विवाह हुआ था लेकिन हार्ट अटैक के कारण उसकी मृत्यु हो गई थी l लड़की बहुत ही होनहार और पढ़ी लिखी है यदि तुम उसे अपने बेटे की बहू बनाना चाहो तो मैं बात आगे चलाऊं l गोदावरी ने कहा मेरी तरफ से हाँ है l धूमधाम से गोदावरी ने बेटे का विवाह किया और आज गोदावरी ईश्वर की कृपा से दादी भी बन गईं है l
गोदावरी ऐसे समाजके लिए मिसाल है जहाँ लोग एक विधवा को अपनाना तो दूर किसी शुभ कारिज में उसकी परछाई से भी परहेज करते हैं l
बिमला रावत
ऋषिकेश उत्तराखण्ड




