तुमको अपनी जीत लिखूं एक भाव पूर्ण काव्य संग्रह
“तुमको अपनी जीत लिखूँ ” गीत , गजल संग्रह जनप्रिय कवि श्री संजय कुमार गिरि जी द्वारा रचित संग्रह है कुल 138 पेज में सिमटे भावपूर्ण संग्रह में देश के महत्वपूर्ण साहित्यकारों ने अपनी शानदार भूमिका के आशीर्वाद रूपी दो शब्दों को लिखकर पहले ही प्रिय संजय जी की कलम पर अपनी सकारात्मक स्वीकृति की मोहर लगा दी है और आपकी सारी रचनाओं में सार्थकता साफगोई के धरातल की स्पष्ठ रूप से झलक दिखलाई पड़ती है किसी भी रचना के रचनात्मक लेखन की ये खास पहचान होती है कि उसकी कलम की बात सभी को सहज सरल सरस् रूप से समझ आती है और रचनाओं में पढ़ने सुननें में अंत तक रसापान बना रहे और रचनाकार और पाठक श्रोता के बीच पढ़ते सुनते समय मधुर सामंजस्य की कड़ी बरकरार बनी रहे जिसका प्रिय संजय जी ने अपनी कलम , सोच से खास खयाल रखा है समस्त रचनात्मक रचनायें रुचिकर हैं और आप सभी से भी गुजारिश है कि आप भी ” तुमको अपनी जीत लिखूं ” को एक बार जरूर पढ़ें। मैं प्रिय श्री संजय जी को इस महत्वपूर्ण संग्रह के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ ….
*पुस्तक समीक्षक*
डॉ चन्द्रमणि ब्रह्मदत्त, संस्थापक अध्यक्ष, इन्द्रप्रस्थ लिटरेचर फेस्टिवल,210,वीर आवास, सेक्टर 18 A, द्वारका,नई दिल्ली।




