यू जी सी सनातन के लिए जहर) जीवन भर भाजपा का समर्थन किया, पर परिणाम यह मिला। जय सवर्ण एकता।

सवर्ण होने के कारण मुझे सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी। हम सवर्ण समाज के लोग वर्षों से आरक्षण का दंश झेल रहे हैं, जबकि सवर्णों में भी बड़ी संख्या में गरीब परिवार हैं। अब स्थिति यह है कि न नौकरी मिल रही है, और न ही पढ़ने का अधिकार सुरक्षित दिखता है। छात्रों के बीच भी जातिवाद का ज़हर भरा जा रहा है। हिन्दुओं को आपस में बाँटने की कोशिश हो रही है, ताकि कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंक सकें। बाहर से नारे दिए जाते हैं बटोगे तो कटोगे लेकिन भीतर ही भीतर वही लोग ज़हर घोल रहे हैं। सच तो यह है कि अगर हिन्दू एक हो गया, तो कुछ लोगों की राजनीति कैसे चलेगी
वाह रे न्याय! यूजीसी के फैसलों में जब ब्राह्मण या सवर्ण का अपमान होता है, तब कोई नहीं बोलता। अब यह साफ़ दिखने लगा है कि भाजपा का अंत इन्हीं नीतियों से होगा। जब वोट मांगने आओगे, तब जवाब दिया जाएगा।
यदि सवर्ण समाज अलग हो गया, तो भाजपा का सत्ता में आना असंभव हो जाएगा, क्योंकि सवर्णों के समर्थन से ही आज आप गद्दी पर बैठे हैं। मोदी जी, ब्राह्मण हमेशा से देश का भला चाहता आया है।
आज राष्ट्रपति दलित समाज से हैं, प्रधानमंत्री ओबीसी वर्ग से हैं, गृहमंत्री सहित कई बड़े पदों पर ओबीसी वर्ग के लोग हैं। सवर्ण समाज ने कभी इसका विरोध नहीं किया। फिर भी हर बार दोष सवर्णों पर ही क्यों मढ़ा जाता है? क्या गलती केवल सवर्ण ही करता है।
आरक्षण दिया हम सवर्णों ने कुछ नहीं कहा विद्यालय में बजीफा सभी सुविधाएं एक नौकरी का फार्म भरने में भी सवर्णों को जिस फ़ार्म के 1000, रुपए देने पड़ते हैं वहीं इनको मात्र दो सौ रुपए मैंने कुछ नहीं कहा,आज नौकरी में जो सवर्ण समाज के बच्चे को 85%,अंक लेकर भी नौकरी नहीं मिलती वहीं दलित ओ वी सी को40%, 45%,पर ही नौकरी मिल जाती है सवर्णों के बच्चे प्रत्येक बर्ष आत्म हत्या करने पर मजबूर हो जाते हैं।ये कैसी एकता है।
अब यू जी सी के निर्णय को देखकर हमारा दिल दहल गया गलती केवल सवर्ण ही करता है सवर्ण बच्चों के ऊपर कोई झूठ दोष लगाए उसका भी बचाव नहीं सवर्ण को चाहे कोई मारे मार डाले उसका भी कोई प्रावधान नहीं अभी जो जुलूस निकाले गए उसमें ही देखिए सवर्णों ने किसी भी ग़लत शब्द का प्रयोग किया हो तो बताइए नहीं किया दलित ओ वी सी ने जो जुलूस निकाले उसमें देखिए कितनी ग़लत भाषा का प्रयोग किया गया।
अभी कुछ समय पहले संतोष वर्मा ने ब्राह्मणों की बेटियों पर कितना गलत वक्तव्य दिया आपने कुछ नहीं कहा बेटी तो किसी की भी हो देवी का स्वरूप होती है।
इस तरह भेद भाव करने से क्या ये आगे बढ़ेंगे नहीं समाज में लड़ाई झगड़े बुराइयां और बढ़ जाएंगी।
किसी भी रेखा से ऊपर उठना है तो उस रेखा को मिटाना एक इंसानियत नहीं न किसी मुखिया राजा का काम है उस रेखा को मिटाना तो गहन अपराध है बल्कि उस रेखा से ऊंची रेखा तैयार कीजिए।
हम सवर्णों को कहां तक नोंचोगे हमें जन्म लेते ही मार डालिए ये अच्छा है पर यह जहर मत घोलिए। हमारे ब्राह्मणों में और भी सवर्णों में बहुत से ऐसे परिवार हैं बहुत ग़रीब है उनके लिए आपने क्या किया कुछ नहीं सवर्णों से इतना बैर भाव कितने सवर्णों के ग़रीब बच्चे आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाते हैं ये आपको दिखाई नहीं देता।हम हिन्दुस्तानियों में आपस में जहर मत घोलिए अब आपका हिंदू राष्ट्र कहां गया। ऐसे हिन्दू राष्ट्र बनेगा इस प्रकार सभी एक होंगे कभी नहीं ये यू जी सी का बिष यूं मत पिलाइए जिससे हम घुट घुट कर मरें हमें इच्छा मृत्यु दे दीजिए हम सभी मरने को तैयार हैं। यू जी सी के नियम हिंदू को बांट रहे हैं आपस में भेद भाव ऊंच नीच पैदा कर रहे हैं।
यह ऊंच नीच हम कर रहे हैं कि आपकी सरकार करवा रही है।
इसी प्रकार देश में आपस में लड़ाई झगड़े होंगे और किन्हीं विदेशी आक्रांताओं का राज़ होगा जैसे पहले आपसी लड़ाई के कारण ही हुआ था।
याद रखना देश और देश की संस्कृति बचाने में जितना योगदान सवर्णों ने दिया है किसी ने भी नहीं।अगर सवर्ण अलग हो गया तो देश की उन्नति नहीं हो सकती ये अटल सत्य है।
विद्यालयों में सभी वर्गों के बच्चे एक साथ खेलते हैं, खाते हैं, पढ़ते हैं। लेकिन जब कोई गलती होती है, तो दंड केवल ब्राह्मण या सवर्ण बच्चे को ही क्यों मिलता है यह सवर्ण-विरोधी भाव अगर इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसे याद रखा जाएगा। मोदी जी
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ जैसे सवर्ण समाज के प्रति यह दुर्भाव आपको बहुत महँगा पड़ेगा। अगर सवर्ण ही अपराधी हैं, तो फिर देश को अलग कर दीजिएजैसे कभी पाकिस्तान बनाया गया था।
जय परशुराम।
जय श्री राम।
उर्मिला पाण्डेय ‘उर्मि’
कवयित्री, मैनपुरी (उत्तर प्रदेश)




