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खोह दरीबा से राष्ट्रीय पहचान तक: डॉ. हितेश गोयल बने युवाओं की प्रेरणा

 

आलोक अवस्थी। नज़र इंडिया 24, ब्यूरो चीफ

अलवर। जिले की टहला तहसील के छोटे से गाँव खोह दरीबा के होनहार पुत्र डॉ. हितेश गोयल ने अपनी मेहनत, लगन और शिक्षा के प्रति समर्पण से ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। डॉ. हितेश गोयल को मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस के विधि, अधिकार एवं संवैधानिक शासन अध्ययन विभाग द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई है। डॉ. हितेश गोयल ने अपराध एवं न्यायिक शिक्षा के क्षेत्र में गहन अध्ययन और शोध कार्य किया है। वर्तमान में वे भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में पुलिस प्रशासन विभाग में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। वे देश के भावी पुलिस अधिकारियों को शिक्षा एवं प्रशिक्षण देकर राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर उनके पिता हुकम चंद गोयल एवं माता बेबी गोयल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता हितेश की कठिन मेहनत, अनुशासन और शिक्षा के प्रति समर्पण का परिणाम है। पूरे गाँव में खुशी का माहौल है तथा ग्रामीणों ने डॉ. हितेश गोयल को गाँव का गौरव बताया।अपनी सफलता पर डॉ. हितेश गोयल ने युवाओं और समाज को संदेश देते हुए कहा कि शिक्षा ही जीवन को नई दिशा देने का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी हो सकती है, लेकिन यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है जब हर बच्चे को शिक्षा का समान अवसर मिले।

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