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इंसान की हार – उर्मिला मोर बरहामपुर ओडिसा

 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर क्षेत्र में दखल दे रही है कोई मैसेज लिखना हो, किसी विषय पर आईडिया चाहिए, सलाह चाहिए, कई चीजों की तुलना हो सब कुछ पलक झपकते ही कर देता है यह पुरानी जादुई कहानियां जैसा लगता है कि जादू की छड़ी घुमाई और जो चाहा वह मिल गया। अब ए आइ ने एक और कारनामा कर दिखाया है जिसके बारे में किसी ने सोचा भी ना था ब्रिटेन में ए आइ वकील ने हाड मांस के इंसानी वकील को कोर्ट में हरा दिया ।यह दुनिया का पहला ऐसा मामला है जहां अदालत में मशीन की दलीलो के सामने इंसान हार गया अब सवाल यही उठता है वकील बनने के लिए कानून की डिग्री चाहिए उसके बाद बार काउ न्सिल से लाइसेंस चाहिए भला यह सब मशीन को कैसे मिल गया इसका जवाब है कि एआई को ना तो कानून की डिग्री मिली है ना ही उसके पास अदालत मे वकालत करने का लाइसेंस है लेकिन हां ब्रिटेन में लाॅफर्म ने गारफील्ड नाम का एक ए आइचैट बॉट तैयार किया है जो आदमी की तरह बात कर सकता है जानकारवकील की तरह दस्तावेज तैयार कर सकता है उनकी जांच पड़ताल कर सकता है गवाहों के बयान दर्ज कर सकता है ।अदालत से अनुमति लेकर इसे काम करने के लिए तैयार किया गया है। इसका काम अदालत से बाहर तक ही सीमित है यह अदालत के अन्दर बहस नहीं कर सकता
पूरा मामला यू है कि ब्रिटेन की एक महिला मानव संसाधन यानी एच आर का काम करती है ।उसने किसी आतिथ्य कंपनी को अपनी सेवाएं दी थी कंपनी की तरफ से उनका लगभग ₹9 लख रुपए का बकाया था अदालत में केस करने के लिए वकील से सेवा लेनी पड़ती है जिसकी फीस भारी भरकम थी ऐसे में महिला ने उस लाॅ फार्म से संपर्क किया ।गारफील्ड एआई नमक चैट बॉटतैयार किया ।फर्म ने गारफील्ड की सेवा के लिये 400 पाउंड यानी लगभग ₹50000 रु.की फीस ली और गारफील्ड को काम पर लगा दिया गारफील्ड ने सारे दस्तावेज को तैयार किए ।चार गवाहों के बयान भी रिकॉर्ड किया उनके दस्तावेज बनाएं। अदालत में केस दायर करने के लिए हर दस्तावेज को तैयार किया गया।अपने पक्ष में क्या दली ले हो सकती थी और विपक्षी वकील क्या दलीले दे सकता था उसे भी दस्तावेजों में शामिल किया। इतना ही नहीं उसने इस केस को अदालत में पेश करने के लिए एक जूनियर बैरिस्टर को भी खुद नियुक्त किया उस जूनियर वकील के सामने कंपनी ने वरिष्ठ वकील को उतारा। 3 घंटे तक दोनों पक्षों में तर्क वितर्क हुआआखिर में जूनियर वकील सीनियर वकील पर भारी पड़ा ।जज ने केस का फैसला गारफील्ड ए आई के पक्ष में सुनाया
यह संकेत खतरनाक है भावनाओं में भले ही मशीन आदमी का मुकाबला न कर पा रही हो गणनाओं के मामले में उसने इंसान को पीछे छोड़ना शुरू कर दिया कितने ही काम है जो एआई बिना किसी मानवीय हस्त्तच्छेप के खुद कर ले रही है। ए आइ मशीनों को प्रशिक्षित किया जा रहा है ।सबसे ज्यादा खतरा आइ टी क्षेत्र की नौकरियों पर मंडरा रहा है ।यह खतरा आने वाले समय में घरेलू आया या नौकरों पर भी आने वाला है आशंका तो यहा तक बढ़ गई है कि कहीं नए भविष्य के सपने के साथ विकसित की जा रही तकनीक पूरी दुनिया को मंदी की ओर न धकेल दे। अगर हर काम मशीन करने लगी तो कारखानाओं में कर्मचारियों की जरूरत ही कहां रहेगी और कर्मचारी नहीं रहे तो कंपनी को तनख्वाह भी नहीं देनी पड़ेगी। लेकिन उस सामान को खरीदेगा कौन।जब कमाई नही रहेगी तो कृयशक्ति भी खत्म हो जाएगी। इंसानी पहलूको ध्यान में नहीं रखा गया तो यह तकनीकी क्रांति सबसे बड़ा हादसा साबित हो जाएगी।
उर्मिला मोर
बरहामपुर ओडिसा

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