पहला प्यार – अर्पिता बाफना

ये बात उस समय की है जब मैं अपनी लॉ कर चुकी थी और अपनी आगे की तैयारी के लिए अपने मामा के घर चली आयी। मेरे लिए रिश्ते की बात होती रहती थी तभी मेरे मामा के घर के बहार ऑफिस रेंट पर लिया हुआ था जहां शेयर मार्केट के व्यापारी रहते। मेरे ननिहाल वाले अक्सर उनकी तारीफ किया करते थे लड़का अच्छा है दिखने में बोल चाल में और अपने नजर में ही रहता है वही लड़का मेरे ननिहाल वाले को भा गया। उस लड़के का रिश्ता मेरे लिए कोविड में आया था तब मुझे और मेरी फॅमिली को ये रिश्ता पसंद नहीं आया और बोला गया की कोविड है लोगों को कम बुलाना है तो कम बजट में हो जाएगा मेरे पापा ने कहा मेरी बेटी कोई बोझ नहीं है और मुझे करनी नहीं यहां इतना कहा था पर किस्मत मुझे वही ले आयी । मै उस दिन मंदिर से आ रही थी वो आफिँस की सीढिया चढ़ रहे थे तब भी हम बस बोले नहीं फिर मैं मामा के दुकान में बैठी थी और उनका शाम को ऑफिस मंगल करके घर की ओर निकलने का समय था तो मुझे मामा ने मेरा उनसे परिचय कराया की ये पुलकित है और मेरा परिचय उनको दिया बस उस दिन इक दूसरे को देखा और पता नहीं था के जीवन इससे ही बँध जाएगा। फिर वो चले गए ओर में अन्दर आ गयी और शाम की रोटी चूलें पर मुझे बनानी थी तो मैं तैयारी कर रही थी तो मामी ने कहा अरे पुलकित जी को कहलवा दो की आज शाम का खाना हमारे यहां और मामा ने कहा लेकिन वो आ नहीं सके। फिर रात को मामी ने कहा अन्ना जी( निकनेम)लड़का अच्छा है कोई गलत हरकत या सोच नहीं आपके लिए ये हमारी पसंद है बस लड़के के बाल कम है यदि इस कमी को छोडकर कोई भी कमी नहीं है मैंने कुछ नहीं कहा तभी उनकी रिक्वेस्ट फेसबुक पर आयी हुई थी मैंने देखा और रिप्लाई नहीं किया। उससे पहले उन्होंने रिक्वेस्ट हटा दी मैंने ये बात अपनी मामी से साझा की तो उन्होंने कहा कि देखो आपको पसंद नहीं आए तो कोई ज़बरदस्ती नहीं है लेकिन दोस्त बनाने में क्या हर्ज है मुझे वो बात ज़मी तो मैंने फेसबुक पर दोस्ती का हाथ बढ़ाया हम एक दूसरे के बारे मे जानने लेगें और हमारी अच्छी पटने लगी ये बात सिर्फ मामी जानती कि हम बात करते थे और बातों बातों में समय निकलने लगा मैं मेरे घर आ गयी पर मेरे मन में दोस्ती से ज़्यादा कुछ नहीं था लेकिन वो दोस्ती से ज़्यादा समझने लगे और मुझे अंदाज़ हो गया मैं उनसे साफ़ शब्दों में कहा में आपसे शादी नहीं कर सकती मेरे खुद कुछ फर्ज है और मैं शादी करना नहीं चाहती आप मेरे साथ अपना घर बसाने के सपने नहीं देखे मैं माफ़ी चाहती हूँ मैं दोस्त होकर खुश हूँ
आप का जीवन अच्छा ख़ुशहाल रहे ये कहे कर मैंने उनको फेसबुक व्हाट सब सब जगह से ब्लॉक कर दिया मेरी जिंदगी में मेरे मम्मी पापा बहुत मायने रखते है उनको परेसानी में देखना मुझे बहुत अच्छा नहीं लगता इसलिए मैंने अपनी खुशियो से ज्यादा अपने माता पिता को चाहा। मैंने मेरी राह तो मोड़ ली लेकिन उनके लिए मुस्किल हो गया उनके लिए मेरे 10 दिन बहुत भारी रहे उन्होंने हर जगह से बात करनी चाही मैंने रास्ते बंद कर दिए पर रास्ता मुझे ढूंढते हुए आ गया में अपनी परेशानी से निकलने के लिए मामा के यहां आयी 2 दिन के लिए मेरे गुरु देव आए हुए थे इसलिए मैं मंदिर हो सके उतना जाती तभी मैंने उनको ब्लॉक से खोला उन्होंने मुझे देखा तब और पूछे तुम आयी हुई हो मुझे बताया तक नहीं और मुझे ब्लॉक तक कर दिया क्या परेशानी है क्या मुझे नहीं बताएगी मैंने कुछ जवाब नहीं दिया वो बहुत ज्यादा बोले तब मैंने अपनी बात रखी और उन्होंने मेरी परेशानी सुलझा दी क्यूँ की मेरे पेरेंट्स की परेशानी हल हुई थी वो खुश मैं खुश तब मुझे लेगा आज जो बिना मुझे जाने बिना किसी मतलब के मेरी जिंदगी में आयी समस्या को सुलझा सकता है वो आगे भी मेरी समस्या को समझेगा और में उस दिन उनको समझने का प्रयास करने लेगी धीरे-धीरे मैं और वो प्यार में आने लगे ।
और एक दूसरे को समझ समझ कर जिंदगी बिताने के सपने सजाने लगे।
अर्पिता बाफना




