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होली और हुड़दंग — विनोद कुमार शर्मा
होली का सद्भावना मिलन रंग भंग पकवान और धर्म संस्कृति सनातनता की रक्षा के लिये नरसिंह अवतार से गहरा नाता…
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एक रूहानी रिश्ता — सुनीता तिवारी”सरस” लघुकथा
लघुकथा ऐसी प्यारी दोस्ती थी हमारी। जहाँ शब्द ही सेतु थे और भाव ही संसार। धीरे-धीरे सुप्रभात केवल अभिवादन…
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आधुनिकता: लुप्त होते संस्कार — राजेन्द्र परिहार सैनिक
समय चक्र चलता रहता है बदलता रहता है,किंतु हमारे मूलभूत संस्कार नहीं बदलने चाहिए, तभी यह समाज उन्नति करता…
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संस्मरण लेख: “रंगोत्सव-संबंधों का पर्व” — श्री पालजीभाई वी राठोड ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर-गुजरात)
होली का दिन आते ही वातावरण में एक नई उमंग छा जाती है।पेड़ पर नई कोंपलें हवा में मस्ती…
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एक मां का जन्म — शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’
जिस दिन मैंने अपनी बेटी को जन्म दिया था, मां, उस दिन तुम्हारी बहुत याद आई। दर्द की हर…
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मेहनत की कमाई — रमेश शर्मा
हमारे यहाँ सुबह सुबह छ:बजे पवन सर्दी गर्मी हो या बरसात रवि बेचारा साईकिल से अखबार डाल कर जाता…
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जब मैंने होली खेली। – उर्मिला पाण्डेय उर्मि कवयित्री मैनपुरी उत्तर प्रदेश। संस्मरण
संस्मरण यह घटना बहुत पुरानी है कम से कम चालीस साल पहले की है। मैं आर्यकन्या इण्टर कॉलेज इटावा में…
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नारी तू कभी ना हारी — हसमुख बी. पटेल, ‘हर्ष’-’परख’ नारदीपुर-अहमदाबाद
मानव सभ्यता के इतिहास में यदि किसी शक्ति ने निरंतर संघर्ष करते हुए भी अपने अस्तित्व, संवेदना और सामर्थ्य…
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नारी — सृजन की शाश्वत धारा — कविता साव पश्चिम बंगाल
नारी केवल एक शरीर नहीं, वह संवेदना की वह गहरी धारा है जो जीवन को अर्थ देती है। वह…
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जयपुर में 86वाँ श्री प्रेमभाया महोत्सव 11 से 14 मार्च तक, भक्ति संगीत से गुंजेगा परकोटा
जयपुर। हैरिटेज सिटी जयपुर को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने में यहाँ की अद्भुत नियोजन एवं स्थापत्य कला…
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