भारतीय इतिहास के कुछ पन्ने — विनोद कुमार शर्मा

मैं उस इतिहास की बात करना चाहूंगा जो गौरवशाली तो बिल्कुल नहीं बल्कि कायरता और गुलामी के हज़ारों वर्षों को भारतीयता लीलने तक का समय अर्थात मुगलों से आजादी तक के कुछ प्रमुख अंश जी बदनुमा दाग का साक्षी है
उस इतिहास को कुछ देशों में चेतावनी या पतन के रूप पढ़ाया जाता जिससे उनका देश गुलामी से बचा रहे l
कुछ हज़ारों मुगल आते लूटते चले जाते लेकिन विखंडित रियासतों को कोई फर्क नहीं पड़ता फिर उन्होंने देश को गुलाम धर्म परिवर्तन और राज्य बढ़ाने का सिलसिला शुरू किया विना अधिक खर्च के मन्दिरों के शिखर तोड़ अपने धार्मिक स्थलों में बदला और हिन्दुस्तानी चुपचाप धर्मांतरण को स्वीकार कर अपने आप को सुरक्षित मान अपनी जान और परिवार को सुरक्षित करने की मानसिकता से बाहर नहीं आए फिर आर्थिक व्यापार करने गोरे लोगों ने वही दोहराया कुछ सौ से कुछ हजारों हो गए और फूट डाल कर राज अत्याचार करते धन दौलत लूट कर अपने देश लौटते l
रानी झाँसी मंगल पांडे ने क्रान्ति का बिगुल बजाया लेकिन अंग्रेजों की दहशत और जी हजूरी करते हुए पड़ौसी राजाओं ने साथ न दिया और गुलामी सौ वर्षों तक और बनीं रही l
फिर जैसे तैसे क्रांतिकारी एकत्र हुए और अँग्रेजी हुकूमत की नाक में दम किया उनमें लाल बाल पाल और सुभाषचंद्र बोस चन्द्रशेखर आजाद भगतसिंह बिस्मिल जैसे सैकड़ों पुरुष और महिलाएं जिससे उन्हें जाना पड़ा लेकिन जाते जाते जिन्ना की सत्ता सुख भूख और गांधी जी जैसे नेताओं ने देश बांट दिया लेकिन धर्म आधारित बंटवारे में पूरी तरह लचीलापन आज देश को कमजोर कर रहा उसी तारतम्य में गाँधी जैसे बैरिस्टर जो भगतसिंह का केस लड़ने न आए आम आदमी को अंदर तक हिला देता है
आज एक और कोशिश यूजीसी के नाम पर फिर से देश को बांटने और राज करने की हिन्दू एकता में जाति पाँति का जहर घोल बांटने की कोशिश का पुरजोर विरोध अति आवश्यक अंग्रेजों की नीति स्वतंत्र भारत में अब नहीं चलेगी अगड़े पिछड़े दलितों के नाम पर देश को रसातल में जाने से बचाएं l
विनोद कुमार शर्मा




