Uncategorized

नैमिष धाम — उर्मिला पाण्डेय उर्मि मैनपुरी उत्तर प्रदेश।

नैमिषाराण्य का अर्थ है जहां निमित्त मात्र भी कलयुग का निवास नहीं है।यह दिखाई देता है अभी अक्षय तृतीया को मैं नैमिष घूमने गयी वहां मैंने कहीं पर भी शराब की दुकानें नहीं देखीं।नैषिष तीर्थ की कथा।
एक वार दैत्यों के अत्याचार से ऋषि गण भयभीत होकर भगवान बृह्मा जी के पास गये ऋषियों ने बृह्मा जी से कहा कि हम सब राक्षसों के अत्याचार से बहुत दुःखी हैं मैं कहां तपस्या करूं बृह्मा जी ने कहा मैं अपने बृह्म चक्र को फेंक रहा हूं यह जहां जाकर गिरेगा वहां कलयुग का वास नहीं होगा सबसे उत्तम श्रेष्ठ स्थान होगा वहीं पर आप सभी तपस्या करें। वहां पर कोई भी राक्षस नहीं जा सकेगा। इस प्रकार वह बृह्म चक्र नैमिष तीर्थ नैमिसारण्य में जाकर गिरा वह बृह्म चक्र नीचे छ: तलों को काट चुका था अब देवता लोग घबराने लगे कि यदि इस बृह्म चक्र ने सातवां पाताल का तल तोड़ दिया तो पृथ्वी पर जल ही जल होकर पृथ्वी जल में मग्न हो जायेगी । सभी देवताओं ने माता पार्वती से प्रार्थना की माता पार्वती ने ललिता देवी का रूप धारण कर बृह्म चक्र को वहीं पर रोक दिया। वहां पर एक पवित्र
जल का कुण्ड बन गया अभी भी है। ललिता देवी का मंदिर भी है। चक्र कुण्ड का जल बहुत स्वच्छ निर्मल है बहुत अच्छा लगा। गोमती नदी का किनारा है जिस गोमती नदी का जल बहुत ही पवित्र निर्मल और स्वच्छ है।
नैमिष तीर्थ में सभी तीर्थ विद्यमान हैं अठ्ठासी हजार ऋषियों की तपस्थली है मेरे गुरुदेव का आश्रम भी वहां पर है जो कम से कम छः सात किलोमीटर जगह में बना हुआ है। त्रिशक्ति मंदिर में भगवान बिष्णु की प्रतिमा का तो कहना ही क्या वह कम से कम पचास फ़ीट ऊंची प्रतिमा है।
ऋषि दधीचि का आश्रम मिश्रित तीर्थ मिश्रिख तीर्थ वहां पर हैं। ऋषि दधीचि के पिता अथर्वा बहन दधिमती पुत्र पिप्पलाद की प्रतिमाएं तथा पत्नी और मां की प्रतिमाएं हैं।दधीचि के आश्रय में देवराज इंद्र अपने अस्त्र शस्त्र रख आए थे जिनसे वृतासुर नामक राक्षस का वध होना था।महर्षि दधीचि चंदन की लकड़ी समझकर उनको घिस घिस कर पी गये।जब इंद्रदेव अपने अस्त्र शस्त्रों को लेने आए वह नहीं मिले उन्होंने दधीचि से पूछा ब्राह्मण ऋषि दधीचि ने कहा कि उनको तो मैं चन्दन समझकर पी गया। इंद्रदेव शोच में पड़ गए अब क्या किया जाए। भगवान बिष्णु के पास गये बिष्णु भगवान ने कहा कि दधीचि की हड्डियों से शस्त्र बनाकर वह राक्षस मारा जाएगा। इंद्रदेव ने जाकर दधीचि को सारी बात बताकर उनसे उनकी हड्डियों की मांग की दधीचि ने कहा मैं अपनी हड्डियां परमार्थ में दान कर दूंगा परंतु मैंने अभी सभी तीर्थ नहीं कर पाए। इंद्र ने कहा जब तक आप सारे तीर्थ करेंगे तब तक वह राक्षस बहुत अत्याचार कर डालेगा।देवराज ने कहा कि मैं सारे तीर्थ यहीं बुलाए देता हूं।
नैमिसाराण्य में चौरासी कोस अर्थात दो सौ बावन किलो मीटर में हिंदुओं के सारे तीर्थ विद्यमान है। जिसने नैमिष धाम की परिक्रमा करली उसमें सभी तीर्थों के दर्शन करके उसने सभी तीर्थों की परिक्रमा करली। वहीं पांडवों का टीला जहां पांडव बारह बर्ष वनवास में रहे हैं। दधीचि कुण्ड सीता कुण्ड मिश्रिख में है व्यास गद्दी जहां बैठकर व्यास जी ने अट्ठारह पुराणों छः शास्त्र ब्राह्मण आरण्यक उपनिषद आदि ग्रन्थों की रचना की। हनुमान गढ़ी, सीता रसोई रामलला कृष्ण लला चारों धाम सभी पुरीं विद्यमान हैं। लोगों का ऐसा विश्वास है कि चक्र कुण्ड में स्नान करने से पाप नष्ट हो जाते हैं और उसका जल घर पर छिड़कने से उपरी अदर्श शक्तियां भाग जातीं हैं। नैमिष तीर्थ की महिमा तो स्वयं सरस्वती भी बखान नहीं कर सकतीं। मैं साधारण प्राणी उसकी महिमा का क्या बखान करूंगी।जय नैमिष धाम।
उर्मिला पाण्डेय उर्मि मैनपुरी उत्तर प्रदेश।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!