आओ पंछियों की पुकार सुनें _ सुनीता तिवारी”सरस”

प्रकृति की गोद में बसे पंछी केवल रंग-बिरंगे जीव नहीं, बल्कि जीवन की मधुरतम ध्वनियाँ हैं।
उनकी चहचहाहट हर सुबह नई ऊर्जा, आशा और उल्लास का संदेश देती है।
जब सूरज की पहली किरण धरती को स्पर्श करती है, तब पंछियों का कलरव वातावरण को जीवंत बना देता है।
यह स्वर मानो हमें याद दिलाता है कि जीवन निरंतर चलने वाली एक सुंदर धुन है।
किन्तु आज के बदलते समय में यह मधुर संगीत धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
बढ़ता शहरीकरण, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन पंछियों के अस्तित्व के लिए खतरा बनता जा रहा है।
उनके घोंसले उजड़ रहे हैं, भोजन और पानी के स्रोत समाप्त हो रहे हैं, जिससे उनकी संख्या में कमी आ रही है।
ऐसे में आवश्यकता है कि हम उनकी पुकार को केवल सुनें ही नहीं, बल्कि उसे समझें भी।
हमें अपने आसपास अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने चाहिए, छतों और आंगनों में पानी के छोटे मिट्टी के सकोरे रखने चाहिए, और पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए।
छोटे-छोटे प्रयास भी पंछियों के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।
पंछियों की पुकार हमें यह सिखाती है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर ही सच्चा सुख प्राप्त किया जा सकता है।
यदि हम आज जागरूक होकर कदम उठाएँगे, तो आने वाली पीढ़ियाँ भी इस मधुर कलरव का आनंद ले सकेंगी।
आओ, हम सब मिलकर इस सुंदर धरोहर को बचाने का संकल्प लें और पंछियों की पुकार को फिर से गूंजता हुआ सुनें।
सुनीता तिवारी”सरस”




