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बारिश के इंतजार में किसान / सुमन दूबे साऊंखोर बड़हलगंज गोरखपुर

 

इस वर्ष गर्मी असामान्य रूप से अधिक पड़ी। जून का महीना बीतने लगा, लेकिन बारिश समय पर नहीं हुई। हमारे क्षेत्र के किसान खेतों की जुताई कर चुके थे और धान की रोपाई की तैयारी पूरी थी, फिर भी आसमान साफ़ था। हर दिन किसान मौसम का हाल देखते और बादलों के आने की उम्मीद करते। बारिश न होने से खेत सूखने लगे, पशुओं के लिए चारे और पानी की भी चिंता बढ़ गई। कई किसानों ने महँगे दामों पर बीज और खाद खरीदी थी, इसलिए उनकी परेशानी और बढ़ती जा रही थी। गाँव की चौपाल पर सभी लोग बस एक ही बात करते—”कब बरसेंगे बादल?”
आख़िर एक शाम काले बादल छा गए और तेज़ बारिश शुरू हो गई। पहली वर्षा की बूँदें पड़ते ही किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई। बच्चों ने बारिश का आनंद लिया और खेतों में फिर से जीवन दिखाई देने लगा। इस दृश्य को देखकर मुझे एहसास हुआ कि किसान का जीवन आज भी वर्षा पर बहुत हद तक निर्भर है। समय पर बारिश केवल अच्छी फसल ही नहीं देती, बल्कि किसान के परिवार में खुशियाँ और नए सपने भी लेकर आती है। इस संस्मरण ने मुझे किसानों के संघर्ष, धैर्य और मेहनत का सम्मान करना सिखाया।

सुमन दूबे साऊंखोर
बड़हलगंज गोरखपुर

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