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हार मानूंगी नहीं -डॉ .दक्षा जोशी ‘ निर्झरा’ अहमदाबाद, गुजरात।

राह कितनी भी हो कठिन, थककर बैठूंगी नहीं ।
मर जाऊंगी, मिट जाऊंगी,
पर, हार मानूंगी नहीं ।
चलना हो जिन्हें वे चले साथ,साहस हो जिनमें
वे बढे साथ ।
रास्ता हो कितना भी दुर्गम,
पीछे मुडकर देखूंगी नहीं
हार मानूंगी नहीं ।
संघर्षों का पथ मैंने चुना है,
गीत अपना मैंने गुना है ।
नगद धर्म की बात करके, उधार जीवन जिऊंगीनहीं ।
हार मानूंगी नहीं ।
सच पर कुहासा छाया है,
झूठ का बहुत बोलबाला है
झूठ से मिले स्वर्ग भी तो,
सच का दामन छोड़ूंगी नहीं
हार मानूंगी नहीं ।
-डॉ .दक्षा जोशी ‘ निर्झरा’
अहमदाबाद, गुजरात।




