Welcome to Nazar India 24   Click to listen highlighted text! Welcome to Nazar India 24
Uncategorized

शीर्षक तर्पण:– शिवा सिंहल की कलम से

दोस्तों सच्चे मन से किया गया श्राद्ध या तर्पण पितरों को सुख की अनुभूति करा आशीष पाते हैं।
*कैसे आइए जानते हैं:-*

**तर्पण:-* अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा से किया गया अर्पण समर्पण ही तर्पण है ।
*-: किस दिन:-* जिस दिन हमारे पूर्वजों का दाह संस्कार होता है। उसी तिथि के दिन ही हम श्राद्ध पक्ष मनाते हैं जैसे किसी का अष्टमी के दिन दाह संस्कार हुआ तो श्राद्ध भी हम अष्टमी को ही मनाएंगे। इस दिन ब्राह्मण को उनका पसंदीदा भोजन बनाकर खिलाया जाता है।
*-: कैसे:-* श्राद्ध की तिथि के दिन जो हम खाना बनाते हैं।हम वो एक थाली में परोसते हैं और एक थाली में हम चार जगह दो-दो पूरी रखते हैं। साथ में पानी के दो गिलास और उनको देने के दक्षिण कपड़े जो भी है वह रखते हैं।
*-: आगे:-* हम दोनों थाली को पास में पानी का गिलास रखते हैं और दही मिठाई तथा नमकीन भी पास में रखते हैं। हमने जो खाने की थाली पड़ोसी है। उसमें से चारों पुरिया पर थोड़ा-थोड़ा मिठाई नमकीन सब्जी खीर दही यह सब रखते हैं। जो हम इन चार पुरिया पर रखते हैं। कहते हैं उनका छठा या कोई 16 हिस्सा हमारे पितरों को मिलता है । हम जल हाथ में लेते हैं थोड़े से तिल हथेली पर रखते हैं। फिर जिन पितरों का हम श्रद्धा कर रहे हैं उनका नाम लेते हैं और सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं हमसे जो बनाएं वह आपके समर्पण कर रहे हैं आपके लिए तर्पण कर रहे हैं आप इन्हें स्वीकार कीजिए और हमें आशीर्वाद दीजिए घर में सुख शांति रहे धन वृद्धि रहे ऐसा कह के वह जल हम थाली पर गोल-गोल हाथ घूमा जमीन पर छोड़ देते हैं । यही हमारे पूर्वजों के लिए तर्पण है ।
*-: चार ग्रास का*-:* अब हमें इन चार ग्रास को किसे देना है।
*1*कौवे के लिए*
*2*दूसरा गाय के लिए*
*3*तीसरा कुत्ते के लिए*
*4*चौथा भिखारी को देने के लिए होता है।*
हम इन चारों ग्रास को कौवे का छत पे रख देते हैं ।
गाय का गाय को दे देते हैं कुत्ते का कुत्ते को खिला देते हैं अगर यदि भिखारी नहीं भी मिले तो हम गाय को दे सकते हैं उसके बाद जो जल का गिलास है जिसे हमने तर्पण किया था वह जल थाली में रखकर गाय के आगे रख देते हैं तो गए पानी पी लेती है।
ब्राह्मण भोज कर ले उसके बाद हम उन्हें दक्षिण कपड़े देकर आशीर्वाद लेते हैं उसके बाद सब भोजन करते है ।
इस दिन पति र धरती पर आकर हमें आशीर्वाद देते हैं और हमारा *तर्पण* स्वीकार करते हैं ।

शिवा सिंहल आबुरोड

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!