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गरीबों की मेहनत और बारिश की मार: दशहरे के लिए रावण बनाने वालों की कहानी — सुनिता त्रीपाठी अजय की जुवानी

 

दशहरा आ रहा था, और शहर की सड़कों पर रावण बेचने वाले गरीब लोगों की उम्मीदें बढ़ रही थीं। ये लोग अपने हाथों से रावण बनाते थे और सड़कों पर बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। इस बार भी उन्होंने अपने काम में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उन्होंने बड़े ही प्यार और मेहनत से रावण बनाए थे। उनकी उम्मीदें थीं कि इस बार वे अच्छी कमाई करेंगे और अपने परिवार के लिए कुछ अच्छा कर पाएंगे।लेकिन उनकी सारी उम्मीदें तब चकनाचूर हो गईं जब दो दिन पहले अचानक बारिश आ गई। बारिश ने उनके सारे रावणों को पानी में डुबो दिया और वे खराब हो गए। उनकी मेहनत बेकार चली गई और उनके सपने टूट गए।एक गरीब आदमी, रामू, ने बताया कि उसने अपने बच्चों के लिए नए कपड़े और मिठाइयाँ खरीदने के लिए इस बार रावण बेचने का प्लान बनाया था। लेकिन अब उसके सारे रावण खराब हो गए हैं और उसे नहीं पता कि वह अपने बच्चों को क्या देगा। एक अन्य आदमी, श्याम, ने बताया कि उसने अपने घर के लिए कुछ जरूरी सामान खरीदने के लिए रावण बेचने का प्लान बनाया था। लेकिन अब उसके सारे रावण खराब हो गए हैं और उसे नहीं पता कि वह अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करेगा। इन गरीब लोगों की कहानी सुनकर मन द्रवित हो जाता है। वे अपने परिवार के लिए कड़ी मेहनत करते हैं और अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करते हैं। लेकिन इस बार की बारिश ने उनके सारे सपने तोड़ दिए।दशहरे के दिन, जब लोग रावण दहन का जश्न मना रहे थे, इन गरीब लोगों के चेहरे पर उदासी थी। वे अपने खराब हुए रावणों को देखकर दुखी थे और नहीं जानते थे कि वे अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करेगें।

सुनिता त्रीपाठी अजय

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