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हिन्दी हमारी भाषा है– डॉ. सरिता चौहान

 

हिंदी हमारी आशा है
यही हमारी भाषा है
मन की अभिलाषा है
विश्व की भाषा है
हिन्दी में पहचान बनाओ
हिंदी में गावो और नाचो
और सुरों से सुन्दर संगीत सजाओ
सभ्यता संस्कृति को बढ़ाओ
जन-जन के मन की मधुर वहि्नी को
आगे बढ़ाओ
देश की शान है हिन्दी
हमारे मन का अभिमान है हिन्दी
आत्म गौरव है हिन्दी
आत्म रक्षा और आत्मसम्मान है हिन्दी
विश्व की पहचान है हिन्दी
कटुता को मृदाता में परिवर्तित करती
बिग वैज्ञानिकता में आध्यात्मिकता को भारती
विज्ञान को आध्यात्मिक से जोड़ती
कहीं न होने पाए नरसंहार
भले परमाणु हो हमारे हथियार
हिंदी हमको यही सिखाती
हृदय में कोमल भाव जगाती
दया क्षमा और त्याग बनो तुम
यह सारे जग को बतलाती
हिन्दी है हम हिंद देश हैं
वेशभूषा और रंग रूप है
विविध संस्कृतियों का मिलन है
सभ्यताओं का संगम है
हिंदी अनूठी ,अनोखी और अनुपम है
तुम भी जानो स्वर व्यंजन को
मिलकर के एक संधि बनाओ
सार्थक शब्दों को जोड़ समास बनाओ
फिर उससे तुम वाक्य बनाओ
सुरीले वाक्य में सुंदर रस सहेज
नवरस का संचार करो तुम
दो रसों को और जोड़कर
कविता का श्रृंगार करो तुम
हिन्दी हिन्दी देश की भाषा है
बच्चे- बच्चे की आशा है
जन-जन की अभिलाषा है
जन गण मन का करें आभार
शब्दों से करें देश के तिरंगे का श्रृंगार
जन गण मन अधिनायक जय है
भारत भाग्य विधाता है

सरिता की यही आशा है
जीवन प्रत्याशा है
सुरों का समागम है
सुखमय और मनोहारी संवाद है
और इसमें यह तो निर्विवाद है
मांग में इसका संपन्न है
प्रतिभावान और बोधगम्य में है
रामचरितमानस का सार है
गीता का उपदेश है
मनुस्मृति की कामायनी है
पाणिनी की अष्टाध्याई है
पतंजलि की महाभाष्य है
हिन्दी जीवन की सच्चाई है
सागर से भी ज्यादा इसमें गहराई है
शब्दों का कोई मोल तोल नहीं है
हर एक शब्द अनमोल है
बन-बन मिलकर भाई-भाई जोड़े हैं
हिन्दी से नाता रग रग में जोड़े हैं
अक्षर अक्षर मिलकर करती
रोज नई पहेली
यह है हम सबकी हमजोली
हिन्दी भाषा अनमोल है
नहीं कोई इसका मोल है
स्वरचित
डॉ. सरिता चौहान

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