लघु कथा : जैसी करनी वैसी भरनी – श्री पालजीभाई वी राठोड ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर-गुजरात

छोटा सा गांव में भवानभाई किसान रहते थे उसकी माता का देहांत हो जाने के बाद पुराने घर में उसके पिताजी रहते थे। पास में ही तीन चार मकान थे मगर वृद्ध पिताजी के रहने की वहां जगह नहीं थी। वृद्ध पिताजी अकेले ही पुराने घर में बसेरा करते थे। भवानभाई और उसकी पत्नी खेत में जाते तब उस के चार-पांच साल का छोटा लड़का दादा जी को पानी की मटकी खाना पहुंचा देता था।
वृद्ध माता पिता को कोई संपत्ति पैसों की जरूरत नहीं होती। वृद्धावस्था में उसको स्नेह प्रेम चाहिए। आजकल वो वृद्ध माता पिता को नहीं मिलता इसी कारण वह दुःखी रहते हैं।थोड़े वक्त के बाद वृद्ध पिता का भी अवसान हुआ। मरने के बाद उसके पीछे बहुत खर्चा किया। मगर क्या फायदा। जीते जी उसको संभालना जरूरी होता है। हम जब छोटे होते तो हमारा वो कितना ख्याल रखते थे। बुढ़ापे में हमारी फर्ज होती है कि हमें उसकी देखभाल करें। पर आजकल वृद्ध माता पिता को वृद्धाश्रम में धकेल देते है।
एक बार ऐसा हुआ उसके पड़ोसी भगुभाई ने भवानभाई को कहा;’ आपका पुराना घर अब खाली पड़ा है।’ आपके पास तीन चार मकान भी है यदि आप बेचना चाह तो मुझे बात करना’। शाम के समय भवानभाई,उसकी पत्नी और उसका छोटा लड़का बैठे थे तब उसने बात की;’ भगुभाई हमारा पुराना घर लेना चाहते हैं। बीच में ही छोटे बालक ने कहा;’पिताजी,यह पुराना घर हमें क्यों बेचना है?’ आप जब वृद्ध होंगे तब आप को काम आएगा। यह सुनकर भवानभाई के पैर तले जमीन फिसल गई। यह सोचने लगे यह छोटे बालक ने कितनी बड़ी बात कही। पिताजी को न संभालने का दुःख भी हुआ। सचमुच हम जैसा करें वैसा ही भुगतना पड़ता है। जैसी करनी वैसी भरनी।जैसा कर्म करेगा वैसा ही फल मिलेगा।
अच्छे कर्म से ही मनुष्य महान होते हैं। जैसा कर्म करेगा वैसा फल मिलता ही है।
श्री पालजीभाई वी राठोड ‘प्रेम’
(सुरेंद्रनगर-गुजरात)




