साहित्य संगम मंच – प्रथम भव्य वार्षिकोत्सव समारोह ,विस्तृत प्रतिवेदन

नई दिल्ली के द्वारका स्थित क्रिएटिव अनलॉक हॉल में साहित्य संगम मंच का प्रथम वार्षिकोत्सव अत्यंत गरिमामय एवं भव्य रूप से संपन्न हुआ। यह आयोजन साहित्य, सृजन और सांस्कृतिक सौहार्द का अद्भुत संगम सिद्ध हुआ, जिसमें देश के प्रतिष्ठित एवं वरिष्ठ साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को चार चाँद लगा दिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में आदरणीय लक्ष्मी शंकर वाजपेई जी, ममता किरण जी, राजेंद्र निगम ‘राज’ जी, इन्दु राज निगम जी तथा नरेश शांडिल्य जी मंचासीन रहे। सभी अतिथियों का स्वागत अत्यंत श्रद्धा एवं सम्मान के साथ किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, जो ज्ञान, प्रकाश और सृजनशीलता का प्रतीक है। इसके पश्चात सौम्या दुआ जी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने वातावरण को आध्यात्मिक और साहित्यिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया।
मंच की संस्थापिका शिखा खुराना जी, अध्यक्ष सुनीला नारंग जी तथा उपाध्यक्ष अलका गर्ग जी द्वारा मुख्य अतिथियों का रंगीन अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न (ट्रॉफी) भेंट कर सम्मान किया गया। इसके उपरांत मंच के साझा संकलन “काव्य कलश” का विधिवत विमोचन किया गया। सभी प्रतिभागियों को अंगवस्त्र, ट्रॉफी, प्रमाण-पत्र एवं काव्य कलश की प्रति देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर तीन महत्वपूर्ण काव्य कृतियों का भी विमोचन हुआ—
“गुनगुनी धूप” – लेखिका: शिखा खुराना
“लफ़्ज़ों की खुशबू” – लेखिका: सुनीला नारंग
“अन्तर्मन की निर्झरणी” – लेखिका: अलका गर्ग
इन सभी पुस्तकों का प्रकाशन काव्य कुमुद प्रकाशन द्वारा किया गया, जिसमें प्रकाशक राजीव त्रिपाठी जी एवं ममता त्रिपाठी जी का सराहनीय सहयोग रहा। पुस्तकों की गुणवत्ता और प्रस्तुति अत्यंत आकर्षक एवं प्रशंसनीय रही।
सांस्कृतिक एवं साहित्यिक प्रस्तुतियों के क्रम में नरेश शांडिल्य जी ने अपनी प्रभावशाली ग़ज़ल से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। लक्ष्मी शंकर वाजपेई जी ने अपने उद्बोधन में कविता की विविध विधाओं—छंदबद्ध एवं छंदमुक्त—पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए तथा अपनी हास्य-हज़ल से वातावरण को आनंदमय बना दिया।
ममता किरण जी ने साहित्य संगम मंच के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं। राजेंद्र निगम ‘राज’ जी ने अपनी भावपूर्ण रचनाओं एवं सुमधुर गीत से वातावरण को जीवंत कर दिया। वहीं इन्दु निगम जी की ग़ज़ल ने श्रोताओं को भाव-विभोर करते हुए पुरानी गायकी की मधुर स्मृतियों को ताज़ा कर दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी, जिससे कार्यक्रम में विविधता और रचनात्मकता का सुंदर विस्तार देखने को मिला।
इस अवसर पर सुनीला नारंग जी ने मंच की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए वर्षभर की गतिविधियों, उपलब्धियों एवं रचनात्मक प्रयासों का विस्तृत विवरण दिया, जो मंच की सक्रियता और निरंतर प्रगति का प्रमाण रहा।
अंत में अलका गर्ग जी द्वारा सभी मुख्य अतिथियों एवं उपस्थित साहित्यकारों का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया गया। समापन चरण में सुनीला नारंग जी, शिखा खुराना जी एवं अलका गर्ग जी ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से कार्यक्रम को एक सशक्त और भावपूर्ण समापन प्रदान किया।
कार्यक्रम के दौरान समय-समय पर जलपान की उत्कृष्ट व्यवस्था भी की गई, जिसने अतिथियों एवं प्रतिभागियों के अनुभव को और अधिक सुखद बना दिया।
साहित्य संगम मंच का यह प्रथम वार्षिकोत्सव न केवल एक सफल आयोजन रहा, बल्कि यह साहित्यिक एकता, सृजनात्मक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक प्रेरणास्पद उदाहरण भी बना। यह आयोजन भविष्य में और भी ऊँचाइयों को स्पर्श करने की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हुआ।




