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दक्षिण-पूर्व एशिया (सिंगापुर, मलेशिया,बैंकोक) मेरी त्रिकोणीय यात्रा ‘-डो. दक्षा जोशी’निर्झरा’

 

विदेश यात्रा केवल नए भूगोल की खोज नहीं, बल्कि अपने दृष्टिकोण के विस्तार का अवसर भी है। सिंगापुर, मलेशिया और बैंकॉक की मेरी यह यात्रा आधुनिकता, संस्कृति और प्रकृति के अद्भुत समन्वय की एक सुखद स्मृति है।
सिंगापुर: आधुनिकता का शिखर-
चांगी एयरपोर्ट की भव्यता से शुरू हुआ यह सफर स्वच्छता और अनुशासन का प्रत्यक्ष प्रमाण था। ‘गार्डन्स बाय द बे’ के जादुई सुपर-ट्रीज़ और ‘मारिना बे सैंड्स’ की गगनचुंबी इमारतें मानव निर्मित वास्तुकला की पराकाष्ठा हैं। वहीं, सेंटोसा ,’नाइट सफारी’ में वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखना एक रोमांचक और अनूठा अनुभव रहा।
मलेशिया: परंपरा और ऊँचाइयों का संगम
कुआलालंपुर में ‘पेट्रोनास ट्विन टावर्स’ की चमक और ‘बाटू केव्स’ की विशाल स्वर्ण प्रतिमा ने दिल जीत लिया। जहाँ एक ओर जेंटिंग हाइलैंड्स की ठंडी वादियों और केबल कार के सफर ने प्राकृतिक सौंदर्य से रूबरू कराया, वहीं यहाँ की वास्तुकला में आधुनिकता और परंपरा का अनूठा सामंजस्य देखने को मिला।
बैंकॉक: जीवंतता और भव्य मंदिर-
थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक अपनी ऊर्जा के लिए जानी जाती है। ‘ग्रैंड पैलेस’ और ‘वाट अरुण’ की बारीक नक्काशी आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है। ‘फ्लोटिंग मार्केट’ की हलचल और ‘चाओ फ्या’ नदी में क्रूज की सवारी ने यात्रा को यादगार बना दिया। यहाँ के मिलनसार लोगों और स्वादिष्ट खान-पान ने इस सफ़र में चार चाँद लगा दिए।
यह यात्रा वैश्विक विविधता को करीब से महसूस करने का जरिया बनी। सिंगापुर का अनुशासन, मलेशिया की विरासत और बैंकॉक की जीवंतता ने मिलकर स्मृतियों का एक ऐसा गुलदस्ता तैयार किया है, जिसकी ख़ुशबू हमेशा मेरे साथ रहेगी।

-डो. दक्षा जोशी’निर्झरा’
अहमदाबाद गुजरात।

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