Uncategorized

असफल होती कूटनीति” – विनोद शर्मा

कूटनीति नेक लेकिन ईमानदारी से क्रियान्वयन जरूरी इतिहास गवाह है बड़े बड़े युद्ध उपरांत संधियों में अथवा युद्ध जैसे हालातों में जब तनाव चरम पर होता कूटनीति सबसे कारगर उपाय काम आते
सनातन धर्म संस्कृति में कूटनीति या चाणक्य नीति विदुर नीति आदिकाल से प्रचलन में हैं जो पर्दे के पीछे से काम करतीं लेकिन व्यापक प्रभाव छोड़ती दैव दानव युद्ध में त्रस्त दोनों ओर से कूटनीति के द्वारा समुद्र मंथन कर नवरत्न अमृत कलश की छीना झपटी से नष्ट होने के पूर्व कूटनीति से बचाया गया उसमें विष निकलने पर जब चारों ओर मौत का हाहाकार मचा तब देवों के देव महादेव जी ने सिर्फ देवताओं को बचाने विष का धारण नहीं किया था।
विदुर नीति अर्थात कूटनीति को कम आंकने विश्व के सर्वश्रेष कर्मयोगी कूटनीतिज्ञ श्री कृष्ण जी के अथक कूटनीतिक प्रयास की अवहेलना की भूल के कारण कौरवों का समूल नष्ट हुआ ठीक उसी प्रकार जैसे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी ने अंगद को कूटनीतिक प्रयासों को सफल होने युद्ध टालने के भरसक प्रयास किए लेकिन रावण के अहंकार के कारण वंश नाश हुआ।
आज के दौर में कूटनीति कमजोर लचर और दिखावा करने में उपयोग हो रही युद्ध का निर्णय पहले कर लिया जाता बातचीत का दिखावा किया जाता यह बात अलग जब निर्णय गलत होता और युद्ध से निकलने का सम्मान जनक उपाय नहीं मिलता जिसकी सजा महंगाई की मार पूरा विश्व झेलता फिर भी चुप रहने को मजबूर।
विनोद शर्मा

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!