Welcome to Nazar India 24   Click to listen highlighted text! Welcome to Nazar India 24
Uncategorized

मौसम की पहली बारिश: धरा के अंतस का उत्सव -डॉ. दक्षा जोशी’निर्झरा’ अहमदाबाद,गुजरात।

 

मौसम की पहली बारिश महज़ पानी की बूंदों का गिरना नहीं, बल्कि तपी हुई धरती के भीतर दबे सब्र का सोंधा प्रकटीकरण है। जेठ की तपन और सीने पर दरारें झेलने के बाद, जब आकाश की पहली बूंद मिट्टी को छूती है, तो वह विरह का अंत और नवजीवन का सृजन होती है। यह क्षण सिखाता है कि जो जितना तपता है, उसका पुनर्जन्म उतना ही महकता है। यह बारिश जहाँ कंक्रीट के जंगलों में सोई मानवीय संवेदनाओं को जगाती है, वहीं एक गहरा सामाजिक विरोधाभास भी सामने लाती है। महलों की खिड़कियों के लिए जो ‘रोमांटिक कविता’ है, किसी झुग्गी के लिए वही टपकती छत की चिंता बन जाती है। धूल से सने पेड़ों का खिलखिलाना और कागज़ की नावों का तैरना यह संदेश देता है कि अतीत चाहे कितना भी शुष्क रहा हो, उम्मीद की एक बौछार सब कुछ हरा-भरा कर सकती है। यह महज़ मौसम का बदलना नहीं, हमारे भीतर जमी बर्फ़ को पिघलाने का कुदरती अनुष्ठान है।

-डॉ. दक्षा जोशी’निर्झरा’
अहमदाबाद,गुजरात।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!