२१३वीं कल्पकथा काव्यगोष्ठी में गूंजे भक्ति के स्वर।

“पितृपक्ष धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण, आरोग्य साधना, की वैज्ञानिक सैद्धांतिक पद्धति है।” – कल्पकथा परिवार
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित, राष्ट्र प्रेम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह जी ने बताया कि सितंबर माह के प्रथम रविवार को आयोजित कल्पकथा परिवार की २१३वीं काव्यगोष्ठी में निरंतर भक्ति भाव और आस्था के स्वर प्रवाहित होते रहे।
दो चरणों एवं लगभग साढ़े चार घंटों के भक्तिभाव को समर्पित आयोजन का शुभारंभ नागपुर महाराष्ट्र से जुड़े वरिष्ठ साहित्यकार विजय रघुनाथराव डांगे ने संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना, सरस्वती वंदना, के साथ किया। जिसमें देश के विभिन्न स्थानों से जुड़े साहित्य सुधि विद्वान सृजनकारों ने भाग लिया।
सीवान बिहार की धरती से जुड़े विद्वान साहित्यकार श्री बिनोद कुमार पाण्डेय जी की अध्यक्षता एवं खैरागढ़ राजनांदगांव छत्तीसगढ़ से जुड़ीं सृजनकार श्रीमती संपत्ति चौरे स्वाति जी के मुख्यातिथ्य का कार्यक्रम निरंतर काव्य रचनाओं के साथ आस्था और भक्तिमय उल्लास के पावन प्रसंगों की आनंदमय चर्चा से सुवासित होता रहा।
आशुकवि भास्कर सिंह माणिक कोंच जालौन उप्र के मंच संचालन में पहली प्रस्तुति कल्पकथा परिवार से पवनेश मिश्र की रही जिन्होंने सरल हृदय भक्त भोलाराम की निश्छल भक्ति का प्रसंग सुनाया जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
यहां से कार्यक्रम व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ा जिसमें देहरादून उत्तराखण्ड से जुड़े वरिष्ठ साहित्यकार गोपाल कृष्ण बागी ने “वो ही मुझे लिखवाता है।” रचना पाठ से वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
वहीं उत्तरकाशी उत्तराखण्ड से सम्मिलित हुईं डॉ अंजू सेमवाल ने “कृपा करो तुम हे मोहन।” गीत के साथ सभी को ब्रज और गोकुल की गलियों की सैर करवा दी।
हरिनगर पीपल्दा कोटा राजस्थान से जुड़े संवेदनशील रचनाकार विष्णु शंकर मीणा ने “आपदा में सहयोग” रचना के साथ मानव धर्म और प्रकृति की रक्षा की अनुशंसा की।
सूरदास सीही फरीदाबाद हरियाणा से जुड़ी विद्वत सृजनकार डॉ जया शर्मा प्रियंवदा ने “राम बनेंगे भरतार जनकदुलारी के” गीत के साथ जनकपुर में राम विवाह का सजीव चित्रण किया।
रायगढ़ छत्तीसगढ़ से जुड़े भौतिक विज्ञान के अध्यापक अमित पण्डा ने शिव स्तुति “उत्तर तुंग हिमालय से दक्षिण में रामेश्वर तक, पत्ता पत्ता ओम लिखा है कंकर कंकर शंकर है।” सुनाते हैं सभी को शिव आस्था में जोड़ दिया।
नागपुर महाराष्ट्र के बहुमुखी प्रतिभा के धनी सृजन मर्मज्ञ विजय रघुनाथराव डांगे ने विचारोत्सव पितृ पक्ष संगीतमय गायन में “धर्म सनातन विधि रचयिता व्रत संयम गृहवार तिथि।” के माध्यम से पितरों को नमन किया।
कल्पकथा संस्थापक दीदी राधा श्री शर्मा ने “चलो रे मन जमुना जी के तीर” रचना गायन के द्वारा माहौल को सुवासित कर दिया।
इनके अलावा बिनोद कुमार पाण्डेय, सुनील कुमार खुराना, संपत्ति चौरे स्वाति, अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप, ज्योति प्यासी, डॉ शशि जायसवाल, अंजनी कुमार चतुर्वेदी श्रीकांत, डॉ श्याम बिहारी मिश्र, आत्मप्रकाश कुमार, भगवान दास शर्मा प्रशांत, भास्कर सिंह माणिक, आदि ने भी काव्य पाठ किया।
दर्शक दीर्घा से ज्योति राघव सिंह, प्रमोद पटले, दुर्गादत्त मिश्र बाबा, डॉ मंजू शकुन खरे, आदि ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण निवाड़ी मप्र से जुड़े विद्वान साहित्यकार एवं प्राचार्य अंजनी कुमार चतुर्वेदी श्रीकांत द्वारा प्रारंभ की गई पितृ पक्ष के धार्मिक आस्था के पौराणिक चर्चा विवरण के प्रारंभ में चंद्रग्रहण एवं पश्चात में सूर्यग्रहण के १२२ वर्षों पश्चात बने दुर्लभ संयोग के सकारात्मक प्रभावों की चर्चा रही जिसमें डॉ शशि जायसवाल, ज्योति प्यासी, भगवानदास शर्मा प्रशांत ने सहभागिता की।
अध्यक्षीय उद्बोधन में बिनोद कुमार पाण्डेय ने आयोजन को सनातन संस्कृति की गरिमा के अनुरूप बताते हुए कहा कि “पितृपक्ष धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण, आरोग्य साधना, की वैज्ञानिक सैद्धांतिक पद्धति है।” मुख्य अतिथि संपत्ति चौरे स्वाति ने कार्यक्रम को सफल बताते हुए कहा कि “उत्सव और पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत है जो समाज को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
कार्यक्रम के अंत में “सर्वे भवन्तु सुखिन:” शांति पाठ के साथ आभार प्रकट करते हुए दीदी राधा श्री शर्मा ने सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।




