कल्पकथा काव्य गोष्ठी में गूंजते रहे माता रानी के जयकारे

“सार्वभौमिक आध्यात्मिक ऊर्जा से चेतना का संपर्क सूत्र होते हैं हमारे वैदिक मंत्र” – कल्पकथा परिवार
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित, राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि २१६वीं कल्पकथा साप्ताहिक ऑनलाइन काव्य संध्या माता रानी की जय जयकार से सम्मोहित होती रही।दो चरणों एवं पांच घंटे से अधिक समय तक चले कार्यक्रम की अध्यक्षता इटावा उप्र से जुड़े विद्वान साहित्यकार श्री भगवानदास शर्मा प्रशांत ने की जबकि नागपुर महाराष्ट्र से जुड़ीं श्रीमती मेघा अग्रवाल ने मुख्य अतिथि का पद भार सम्हाला।
कोंच जालौन के आशुकवि भास्कर सिंह माणिक के मंच संचालन के आयोजन का शुभारंभ श्री विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना, सरस्वती वंदना, के साथ किया गया। उसके बाद मानों स्वर प्रवाहों को बहते हुए जल की तरह दिशा मिल गई।नवदुर्गा के नौ रूपों समेत आदिशक्ति भगवती माँ जगदम्बा के विविध स्वरूपों को नमन करते हुए देश – विदेश से जुड़े कलम कारों ने समूचा परिदृश्य भक्ति के रंगों से सजा दिया। डॉ श्याम बिहारी मिश्र ने अनुग्रह याचना रचना में अम्बे माता को प्रार्थना करते हुए कहा “हे आदिशक्ति अम्बे इस जग का सारा शोक बिदारें।”अमित पण्डा अमिट रोशनाई ने जगदम्बे मईया की आरती करते हुए “जय अम्बे माँ जगदम्बे माँ करूं आरती तेरी, माँग रहा हूं दर पर तेरे भर दे झोली मेरी।” स्वरबद्ध गाया।विजय डांगे ने मातृ वंदना में “नवरात्रि की आई बहार आरती पूजन माँ, नौ दिन नौरूप माता भजन और भक्ति माँ” वंदन गीत से माता रानी की प्रार्थना की। डॉ. अंजू सेमवाल ने “जगजननी हे शेरावाली द्वार तेरे मैं आई हूं, नथनी झुमके हार और साड़ी भेंट प्रेम से लाई हूँ।” की शाब्दिक भेंट से मईया को श्रृंगार अर्पित किया। डॉ. मंजू शकुन खरे ने शक्ति आराधना में “शक्ति के विद्युत कण जो बिखरे अखिल ब्रह्मांड में, उपासना हैं सभी माँ तेरे ही आगार में।” के विशेष भाव को स्वर दिया।इनके अलावा सुनील कुमार खुराना, संपत्ति चौरे स्वाति, ज्योति प्यासी, डॉ शशि जायसवाल, अंजनी कुमार चतुर्वेदी श्रीकांत, प्रमोद पटले, रमेश चंद्रा गौतम, रेनू शर्मा, नेहा शर्मा वर्षा, सांद्रा लुटावन गणेश, मेघा अग्रवाल, किरण अग्रवाल, श्रीपति रस्तोगी, दिनेश दुबे, भगवानदास शर्मा प्रशांत, भास्कर सिंह माणिक, दीदी राधा श्री शर्मा, पवनेश मिश्र आदि ने नवरात्रि के शुभ अवसर आदिशक्ति भगवती माँ दुर्गा की वंदना की।अध्यक्षीय उद्बोधन में भगवान दास शर्मा प्रशांत ने सारगर्भित रूप से आयोजन में जुड़े सभी कलमकारों की श्रद्धा और विश्वास की सराहना करते हुए समग्र परिदृश्य पर सारगर्भित विचार रखे। वहीं मुख्य अतिथि मेघा अग्रवाल ने काव्यगोष्ठी में देश – विदेश से जुड़े साहित्यकारों की गरिमामय उपस्थिति का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कार्यक्रम को अनेकता में एकता का सफल आयोजन बताया।दीदी राधा श्री शर्मा ने सभी सहभागी सृजनकारों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि हमारे वैदिक मंत्र सार्वभौमिक आध्यात्मिक ऊर्जा से चेतना का संपर्क सूत्र होते हैं इनका सदुद्देश्यपूर्ण पाठ आत्मा और परमात्मा के मध्य सीधा संबंध स्थापित करता है। अंत में “सर्वे भवन्तु सुखिन:” की सर्व मंगल कामना के साथ कार्यक्रम को विश्राम दिया।



