हिंदी ग़ज़ल को नया आयाम : डॉ. हिमांशु बृजेश ‘शिखर’ के संग्रह का लोकार्पण

रोटरी अहमदाबाद सॉलिटेयर एंड बिलीव फाउंडेशन की तत्वावधान में एक लिटरेरी कॉन्क्लेव समारोह में गजल संग्रह पुस्तक का विमोचन समारोह हुआ। प्रोग्राम की अध्यक्षता रोटेरियन श्री निगम चौधरीजी ने की और चीफ गेस्ट हिंदी कवि डॉ. श्री ऋषिपाल धीमानजी थे। रोटेरियन डॉ. हिमांशु बृजेश ‘शिखर’ के हिंदी ग़ज़ल कलेक्शन ‘समंदर सिखाता रहा’ का विमोचन किया गया।इस किताब की बिक्री से मिलने वाली पूरी धनराशि ज़रूरतमंद बच्चों के मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए इस्तेमाल की जाएगी।AMA में हुए लिटरेरी प्रोग्राम में वरिष्ठ और विशिष्ट कवि और शिक्षणविद प्रो. श्री देवेंद्र आचार्यजी, ग़ज़ल राइटर डॉ. बृजेश माथुरजी, वरिष्ठ गीतकार चंद्रमोहन तिवारी, मशहूर कवि मुकेश शर्मा सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कीनोट एड्रेस मशहूर हिंदी राइटर और कवयित्री श्रीमती निशा चंद्रा ने दिया।
इस अवसर पर गुजराती साहित्यिक गृप के सदस्यो की ओर से गुजरात के प्रसिद्ध शिक्षणविद श्री देवेंद्र आचार्य जी ने रोटेरियन डॉ. हिमांशु बृजेश ‘शिखर’ को सन्मानित किया। नजर इंडिया के पत्रकार व साहित्यकार श्री हसमुख पटेल जी और प्रीति शाह पटेल गौरवान्वित पलों का हिस्सा बने। नजर इंडिया ग्रुप की ओर से कार्यक्रम को अभिनंदन दिया गया । अस्मिता गृप के सदस्यो ने भी स्वागत किया।
समारोह में साहित्य, पत्रकारिता, समाजसेवा, शिक्षा, ज्योतिष, कृषि, कला, मीडिया व फैशन जैसे विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली हस्तियों को भी सम्मानित किया गया। बिलीव फाउंडेशन के संस्थापक ने सभी आगंतुकों का स्वागत करते हुए संस्था की सामाजिक गतिविधियों की जानकारी साझा की।इस गरिमामयी समारोह ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा किसी एक सीमित दायरे में नहीं बंधी होती चाहे वह विशेष आवश्यकता वाले बच्चे हों, या कलम से समाज को दिशा देने वाले साहित्यकार। बिलीव फाउंडेशन का यह प्रयास समाज में समरसता और समर्पण की भावना को और मजबूत करता है।इस रोटरी लिटरेरी कॉन्क्लेव में लिटरेचर लवर और दीर्घ मीडिया के संस्थापक सरस्वतीचंद्र आचार्य एवं मनीषा शर्मा भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन पूनम जैन अग्रवाल ‘चांदनी’ ने किया। समंदर सिखाता रहा गजल संग्रह के विमोचन कार्यक्रम की आभार विधि सरस्वतीचंद्र आचार्य जी ने अपने ,बेहतरीन अंदाज में की। यह यादगार कार्यक्रम २२ नवम्बर शनिवार को आयोजित हुआ था !




