समाज के बदलाव में साहित्य का योगदान — अलका गर्ग,गुरुग्राम

साहित्य के योगदान के बिना समाज में बदलाव अकल्पनीय है।यह बात शत् प्रतिशत सही है कि साहित्य ही समाज की रीतियाँ,कुरीतियाँ,गतिविधियाँ,
कार्यकलाप,बुराई ,अच्छाई,पतन,विकास सभी का हुबहू खाका खींचता है।
किसी भी देश के साहित्य को पढ़ कर उस देश का भूत और वर्तमान अच्छी तरह से जाना का सकता है क्योंकि साहित्य दर्पण की भाँति सब कुछ साफ़ दिखाता है।समसामयिक साहित्यकार हरेक घटना विशेष का उल्लेख बड़ी ही बारीकी से करते हैं जिससे सदियों बाद भी पढ़ कर कोई भी रूहानी तौर पर उसी काल में पहुँच कर सब कुछ महसूस कर सकता है।
साहित्यकार अपनी लेखन कला से समाज में बदलाव की बयार लाता है।इतिहास गवाह है कि कलम की ताक़त बड़े बड़े रजवाड़ों, सभ्यताओं और सल्तनत में सामाजिक बदलाव लेन में सक्षम रही है।
तत्कालीन साहित्यकारों द्वारा लिखे गए उपन्यास,कहानी और काव्य जबरदस्त बदलाव ले कर आए हैं।अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना ,बगावतें,
सामाजिक विकृतिओं के ख़िलाफ़ क्रांति,मोर्चे ,सभी साहित्य की ही देन हैं।
जन जन के मन में आज़ादी की अलख जगा कर देशभक्ति ,वीर रस से परिपूर्ण गीत कवितायें स्वतंत्रता संग्राम में अभूतपूर्व रूप से सहायक सिद्ध हुईं।
आधुनिक युग में साहित्य का रूप बदल कर काग़ज़ कलम अखबार उपन्यास पत्रिकाओं के बदले डिजिटल हो गया है परंतु साहित्य का काम नहीं बदला है।साहित्य अभी भी सामाजिक बदलाव का अपना कार्य भली भाँति कर रहा है।नई पीढ़ी और अधिक जागरूक और तेज है।अपने उलावलेपन के कारण वह त्वरित निर्णय लेती है।
सोशल मीडिया टेलीविजन भी साहित्य की रफ़्तार को बढ़ाने में सहायता कर रहे हैं।जिसके कारण बदलाव की रफ़्तार कई गुना बढ़ गई है।
साहित्य समाज को वैचारिक सुदृढ़ता
प्रदान करता है।हमारी सांस्कृतिक धार्मिक सामाजिक स्थितियों को व्यक्त करने के लिए साहित्य का बड़ा सहयोग करता है।यह न्याय और अन्याय दोनों के प्रति आवाज़ उठाने में सक्षम है।समाज के हर पहलू पर प्रकाश डालता है।
अत: समाज के बदलाव में साहित्य का अभूतपूर्व योगदान है इसमें कोई दो राय हो ही नहीं सकतीं।
अलका गर्ग,गुरुग्राम




