कल्पकथा और विशुद्ध साहित्य संस्थान ने साझा किया काव्य मंच। अरावली पर्वतमाला के सम्मान और संरक्षण को समर्पित रही काव्य संध्या।

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने बताया कि विशुद्ध साहित्य संस्थान एवं कल्पकथा परिवार के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित २२९वीं साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी का मंच अरावली पर्वतमाला के सम्मान और संरक्षण को समर्पित रहा।विशुद्ध साहित्य संस्थान से विद्वान साहित्यकार श्री देवेन्द्र सिंह की अध्यक्षता एवं कोंच जालौन उप्र के ओजशैली के आशु कवि श्री भास्कर सिंह माणिक के मुख्य आतिथ्य में काव्यगोष्ठी में देश – विदेश के विद्वान साहित्यकार जुड़े।मनीष जोशी जी एवं पवनेश मिश्र के मंच संचालन के कार्यक्रम का शुभारंभ नागपुर महाराष्ट्र के वरिष्ठ साहित्यकार विजय रघुनाथराव डांगे जी द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना, सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
काव्य गोष्ठी में बिनोद कुमार पाण्डेय, डॉ० अंजू सेमवाल, आनंदी नौटियाल अमृता, अमित पण्डा अमिट रोशनाई, सांद्रा लुटावन गणेश, भास्कर सिंह माणिक, ज्योति प्यासी, सुजीत कुमार पाण्डेय, गोपाल कृष्ण बागी, ज्योति राघव सिंह, मनीष जोशी, डॉ वेद प्रकाश भट्ट सत्यकाम, देवेंद्र सिंह, किरण सुमन, माया शर्मा, शशि भूषण मिश्र शिवदास, विजय रघुनाथराव डांगे, दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा, पवनेश मिश्र आदि ने ने गरिमामय काव्य रचनाओं से वातावरण को ऊर्जान्वित किया जबकि डॉ श्रीमती जया शर्मा प्रियंवदा, गीतांजलि जोशी, डॉ श्रीमती नलिनी शर्मा कृष्ण, धर्मराज, नन्द किशोर बहुखंडी, डॉ श्याम बिहारी मिश्र, अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप, डॉ श्रीमती मंजू शकुन खरे, आदि ने दर्शक दीर्घा में रहकर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा सूरदास सीही फरीदाबाद हरियाणा से प्रबुद्ध साहित्यकार डॉ श्रीमती जया शर्मा प्रियंवदा जी का जन्म दिन का। इस विशेष अवसर पर आयोजन में जुड़े सभी सृजनकर्ता जनों ने उन्हें संगीतमय स्वरबद्ध बधाई दी।अध्यक्षीय उद्बोधन में देवेंद्र सिंह जी ने आयोजन की सफलता पर संतोष प्रकट करते हुए कहा कि यह जानकर प्रसन्नता हुई कि कल्पकथा और विशुद्ध साहित्य संस्थान जैसी संस्थाएँ ज्वलंत और सामाजिक मुद्दों को भी मुखर और सकारात्मक रूप से समाज के सामने का रहीं हैं। वहीं मुख्य अतिथि माणिक जी ने साहित्यकारों की प्रशंसा करते हुए कहा प्राकृतिक संरचनाओं के संरक्षण और सामाजिक चिंतन से ओत – प्रोत ऐसे कार्यक्रम समाज में चैतन्यता के लिए आवश्यक है।आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों, एवं दर्शकों का आभार प्रकट करते हुए कल्पकथा संस्थापक दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा ने सभी को धन्यवाद किया। अंत में वन्दे मातरम् के १५०वें स्मरणोत्सव वर्ष में अमर बलिदानियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, और राष्ट्रप्रेमी जनों के सम्मान में राष्ट्र गीत वन्दे मातरम् गायन हुआ तत्पश्चात सर्वे भवन्तु सुखिन: शांति पाठ के साथ कार्यक्रम को विश्राम दिया गया।




