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स्वयंसिद्धा साहित्यिक संस्थान द्वारा युवा दिवस का गरिमामय आयोजन

सुनिता त्रिपाठी’अजय। नजर इंडिया ब्यूरो चीफ

जयपुर। स्वयंसिद्धा साहित्यिक संस्थान के तत्वावधान में युवा दिवस के अवसर पर एक गरिमामय साहित्यिक एवं बौद्धिक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रख्यात लेखिका शशि मंगल की दो पुस्तकों— “फुहारें” एवं “पुरुष पत्थर का?”—का विधिवत विमोचन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ वीणापाणी की वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात मंचस्थ अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया गया।
संस्थान की संस्थापिका ज्ञानवती सक्सेना ने अपने प्रेरक उद्बोधन में साहित्य की सामाजिक भूमिका और युवाओं की रचनात्मक सहभागिता पर प्रकाश डाला। संस्थान की संरक्षिका कुसुम शर्मा ने साहित्य को संवेदना और चेतना का सशक्त माध्यम बताया।
इसके पश्चात “फुहारें” पुस्तक का विमोचन किया गया। कुसुम शर्मा जी ने पुस्तक की कविताओं की सारगर्भित समीक्षा करते हुए उनमें निहित पक्षियों की व्यथा, मानवीय संवेदना एवं जीवन की सूक्ष्म अनुभूतियों को रेखांकित किया। युवा दिवस के संदर्भ में उन्होंने उत्साहपूर्ण गीत “जवानी दीवानी जिंदाबाद” से अपनी प्रस्तुति को भावपूर्ण विराम दिया।
द्वितीय चरण में “पुरुष पत्थर का?” पुस्तक का विमोचन संपन्न हुआ। वरिष्ठ साहित्यकार सुषमा शर्मा जी ने अपने आशीर्वचनों में इस कृति को स्त्री–पुरुष संबंधों की मनोवैज्ञानिक एवं संतुलित व्याख्या बताया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक न किसी एक पक्ष का समर्थन करती है, बल्कि स्त्री और पुरुष को एक-दूसरे के पूरक के रूप में प्रस्तुत करती है।
गंगटोक से पधारी कवयित्री सुजाता पुरोहित ने लेखिका शशि मंगल का आत्मीय परिचय प्रस्तुत किया। तत्पश्चात शशि मंगल जी ने स्वयं अपनी पुस्तकों की रचना-प्रक्रिया और विषय-वस्तु पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में इटर्नल हॉस्पिटल के मार्केटिंग हेड द्वारा लाभकारी कार्ड की जानकारी दी गई तथा सोसायटी हेल्थ चैंपियन पोस्टर का विमोचन किया गया। डॉ. सौम्या सोमेन्द्र ने हृदय-स्वास्थ्य पर उपयोगी जानकारी साझा की और रोचक प्रश्नोत्तरी के माध्यम से श्रोताओं को जागरूक किया।

इस अवसर पर चिकित्सकों का सम्मान एवं धन्यवाद ज्ञापन भी किया गया, साथ ही मालाबार संस्थान का आभार व्यक्त किया गया। युवा दिवस के विशेष संदर्भ में दुबे सर का प्रेरक व्याख्यान हुआ। ज्योत्सना ने युवाओं को उद्देश्यपूर्ण जीवन और साहित्य से जुड़ने का संदेश देते हुए अपना वक्तव्य रखा। वहीं अमित शर्मा ने “साहित्य में एआई का उपयोग” विषय पर प्रोजेक्टर के माध्यम से उपयोगी एवं समसामयिक जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली मंच संचालन चंचल शर्मा ‘चपल’ द्वारा किया गया। अंत में कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रबोध गोविल जी ने अध्यक्षीय संबोधन में आयोजन की सराहना करते हुए साहित्य, स्वास्थ्य और तकनीक के समन्वय को समय की आवश्यकता बताया।
सुनिता त्रिपाठी’अजय

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