भक्ति में अपार शक्ति है — सुनीता तिवारी”सरस”

कहानी
एक छोटे से गाँव में गोपाल नाम का एक साधारण किसान रहता था।
उसकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन उसका मन अत्यंत समृद्ध था।
वह हर सुबह उठकर पूरे मन से भगवान की भक्ति करता और फिर अपने खेतों में काम करने निकल जाता।
गाँव के लोग अक्सर उसका मज़ाक उड़ाते थे।
वे कहते,
केवल भक्ति से पेट नहीं भरता,
मेहनत करो और भगवान को कम याद करो।
लेकिन गोपाल मुस्कुरा कर कहता,
मेहनत भी कर रहा हूँ और भक्ति भी।
दोनों मिलकर ही जीवन को सफल बनाते हैं।
एक वर्ष गाँव में भयंकर सूखा पड़ा।
खेत सूख गए, कुएँ सूख गए और लोगों के पास खाने तक का संकट आ गया।
सभी किसान चिंतित और परेशान हो गए।
गोपाल के पास भी कुछ खास साधन नहीं थे, फिर भी वह रोज़ की तरह पूजा करता और भगवान से प्रार्थना करता
हे प्रभु, सबका भला करो।
एक दिन गाँव में एक संत आए।
लोगों ने उनसे अपनी परेशानी बताई।
संत ने कहा,
जिसके मन में सच्ची श्रद्धा और भक्ति है, वही इस संकट से उबर पाएगा।
सबको आश्चर्य हुआ, क्योंकि वे तो केवल बाहरी उपायों में लगे थे।
उसी रात गोपाल ने पूरे विश्वास के साथ भगवान का नाम लिया और प्रार्थना की।
अगले दिन सुबह उसके खेत के पास एक छोटा सा जलस्रोत फूट पड़ा। धीरे-धीरे पानी फैलने लगा और उसका खेत हरा-भरा हो गया।
यह देखकर गाँव वाले चकित रह गए।
गोपाल ने उस पानी को केवल अपने लिए नहीं रखा, बल्कि पूरे गाँव के खेतों तक पहुँचाने का प्रयास किया।
उसकी निस्वार्थ भावना और भक्ति ने पूरे गाँव को बचा लिया।
गाँव वालों को अपनी गलती का एहसास हुआ।
उन्होंने गोपाल से माफी माँगी और समझ गए कि सच्ची भक्ति में अपार शक्ति होती है।
वह केवल चमत्कार ही नहीं करती, बल्कि इंसान के मन को भी बदल देती है।
उस दिन के बाद गाँव में हर व्यक्ति ने भक्ति और मेहनत दोनों को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया।
सीख: सच्चे मन से की गई भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि वह असंभव को भी संभव बना सकती है।
सुनीता तिवारी”सरस”




