मोबाइल की दुनिया में खोता बचपन

आज वर्तमान समय में मोबाइल की दुनिया में बच्चों का खोता बचपन बिल्कुल सही है। क्योंकि आज के अभिभावक बाल्यावस्था में ही बच्चों को हाथ में मोबाइल दे देते हैं। मोबाइल से वह तरह-तरह के गेम तरह-तरह के कार्टून दिन भर देखते रहते हैं। इससे अभिभावक को बच्चों की शैतानियों से मुक्ति मिलती है। लेकिन अभिभावक को यह नहीं पता कि उनके शैतानियों को निजात पाने के लिए हाथ में मोबाइल देने से कितना नुकसान हो सकता है। जैसे की बच्चों का शारीरिक मानसिक विकास रुक जाता है। बच्चों में अपनेपन की दूरियां दूर हो जाती हैं। अपने माता-पिता से दूर हो जाते हैं। मोबाइल को अपना बना लेते हैं। मोबाइल के मकड़ जाल में फस जाने से बच्चे उदासीन हो जाते हैं। बच्चों में अकेलेपन की भावना आ जाती है। वह बच्चों के लिए बहुत नुकसानदायक है। बच्चे शारीरिक श्रम से वंचित हो जाते हैं खेल से वंचित हो जाते हैं घर के कार्यों से वंचित हो जाते हैं जिसके कारण से बच्चे निठलेपन हो जाते हैं।
सुरेंद्र कुमार बिंदल कलमकार जयपुर राजस्थान।
स्वरचित
प्रमाणित करता हूं कि मैं सुरेंद्र कुमार बिंदल पुत्र मदन लाल बिंदल निवासी जयपुर राजस्थान उपरोक्त लेख मेरे द्वारा लिखा गया है कहीं से भी इसे लिया गया नहीं है आप इसे प्रकाशित करने की कृपा करें।
धन्यवाद




