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मातृ भाषा का सम्मान करते हुए हिंदी का राष्ट्र की राष्ट्रभाषा के रूप में निर्धारण होना चाहिए – प्रदीप मिश्र अजनबी।

डॉ मंजू शकुन खरे एवं कीर्ति त्यागी ने प्रश्नों से सजाया कल्प भेंटवार्ता मंच।

 

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि श्रीमती कीर्ति त्यागी के संयोजन में कल्प भेंटवार्ता कार्यक्रम में मेरठ उप्र के विद्वान साहित्यकार, समाजसेवी, प्रचारक श्री प्रदीप मिश्र अजनबी जी को कल्प भेंटवार्ता पत्रम से सम्मानित किया गया।

डॉ श्रीमती मंजू शकुन खरे के कुशल मंच संचालन के प्रेरक संवाद कार्यक्रम में प्रश्नों के उत्तर देते हुए मिश्र जी ने कहा कि मातृ भाषा का सम्मान करते हुए राष्ट्र की राष्ट्रभाषा का सम्मान होना चाहिए। जिसके लिए आज के वातावरण में हिन्दी सर्वश्रेष्ठ विकल्प है।

कल्पकथा के यूट्यूब चैनल पर सीधे प्रसारण के कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथि साहित्यकार को सम्मानित करते हुए दिव्य गंगा मिशन के राष्ट्रीय संयोजक एवं द ग्राम टुडे समाचार पत्र समूह के संस्थापक डॉ शिवेश्वर दत्त पाण्डेय ने कहा कि साहित्य के विकास के लिए साहित्य सेवियों को विचारों की मौलिकता, शब्दकोष के विस्तार, भाषा के सौंदर्य और शब्दों के संकेंद्रित प्रयोग का मान रखते हुए निष्पक्ष लेखन करना चाहिए।चार चरणों क्रमशः व्यक्तिगत परिचय, साहित्यिक यात्रा, दर्शकों के प्रश्न, और चटपटे प्रश्न अटपटे उत्तर, के विशिष्ठ आयोजन के अंत में वन्दे मातरम् राष्ट्रगीत का गायन किया गया। तत्पश्चात आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों, एवं दर्शकों का आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम को विश्राम दिया गया।

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