सोशल मीडिया में साहित्य का महत्व”- – नरेश चन्द्र उनियाल, ‘कमली कुंज’ देहरादून, उत्तराखण्ड।

मैं अपने आलेख के शीर्षक को दो तरह से परिभाषित करने का प्रयास करूंगा… सोशल मीडिया में साहित्य का महत्व” और “आज के साहित्य में सोशल मीडिया का महत्व”
मैं तब कक्षा 11वीं में था, जब अपनी पहली काव्य रचना लिखी-
‘हे विश्वपूज्य इंग्लिश दीदी, तू होती क्यों याद नहीं,
करता हूँ प्रार्थना बार-बार, तू सुनती क्यों फरियाद नहीं’
यह रचना लिखी गई और आयी-गयी हो गई। क्योंकि तब उस रचना को प्रकाशित/प्रसारित करने के लिए आज के जैसी सुविधा नहीं थी… सोशल मीडिया नहीं था।
बहरहाल… समय गुजरा, सोशल मीडिया नें घर-घर जगह बनाई और आज हर व्यक्ति सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी योग्यता/कला का प्रदर्शन कर रहा है और लोकप्रिय हो रहा है।
इस प्रदर्शन में साहित्य /साहित्यकार भी पीछे क्यों रहेगा.. आज नवोदित और वरिष्ठ साहित्यकार सोशल मीडिया में खूब छाये हुए हैं….साहित्यकार लोकप्रिय हो रहे हैं। दुनिया उनको पहचान रही है। आज मैं आप सभी आदरणीय जनों के बीच यह आलेख प्रेषित कर पा रहा हूँ/आप जान पा रहे हैं कि उत्तराखण्ड से नरेश उनियाल भी कोई इंसान है तो इसके पीछे यही सोशल मीडिया जिम्मेदार है। इसके लिए मैं तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को हार्दिक बधाई ज्ञापित करता हूँ।
आज के परिपेक्ष्य में सोशल मीडिया में साहित्य का बहुत बड़ा महत्व है। हम जान रहे हैं कि समाज में संस्कार और नैतिकता लगभग नष्ट हो रही है /हो गई है। समाज यद्यपि अत्यधिक पढ़ा-लिखा हो गया है पर कहना पढ़ेगा कि अनाचार भी पराकाष्ठा पर है। सारा युवावर्ग सोशल मीडिया का जमकर प्रयोग कर रहा है, यह अच्छी बात है। यहाँ हम साहित्यकारों का यह कर्तव्य बनता है कि हमारे साहित्य में नैतिकता और संस्कारों की भी शिक्षा हो…. पथभ्रष्ट युवाओं के लिए कुछ सार्थक संदेश हो। जिसे युवावर्ग सोशल मीडिया पर पढ़कर कुछ तो सकारात्मक सीखे।
अंतत : यही कहूंगा कि सोशल मीड़िया में साहित्य का बहुत बड़ा महत्व है बशर्ते लिखने वाले की नीयत समाज सुधार की हो और पाठक वर्ग (विशेषत: युवा वर्ग ) मोबाईल गेम से बाहर निकलकर साहित्य को पढ़ने में रूचि दिखाए। बहरहाल दुनिया में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने के लिए मैं सोशल मीडिया को कोटिशः साधुवाद ज्ञापित करता हूँ।
– नरेश चन्द्र उनियाल,
‘कमली कुंज’
देहरादून, उत्तराखण्ड।




