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सब भावों का खेल है — महेन्द्र कुमार सिन्हा जय महासमुंद छत्तीसगढ़

यहां सब भावों का खेल है ।परम पिता परमात्मा को हम किसी वस्तु सामाग्री से नहीं बस भावों से ही रिझा सकते हैं। प्रभू हमारे अंतर्मन की भावनाओं को ही देखते है। उसके लिए हमारे वस्तु सामाग्री साधन आसन का कोई मोल नहीं है। प्रेम भाव भक्ति से ही परम पिता परमात्मा परमेश्वर को प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। प्रभु अपने भक्त के भावों को ही स्वीकार करते हैं। प्रभु के यहां तो बस भावों का खेल है।
महेन्द्र कुमार सिन्हा जय
महासमुंद छत्तीसगढ़




