मां शबरी की भक्ति — सपना बबेले स्वरा
बहुत समय पहले एक वन में एक भीलनी रहती थी, जिसका नाम शबरी था। वह बचपन से ही दयालु और सरल स्वभाव की थी। एक बार उसने देखा कि उसके गाँव में शादी के अवसर पर बहुत सारे पशुओं की बलि दी जा रही है। यह देखकर उसका मन दुखी हो गया और वह जंगल छोड़कर भाग गई।
भटकते-भटकते वह एक आश्रम में पहुँची, जहाँ महान संत मातंग ऋषि तपस्या कर रहे थे। शबरी ने उनके चरणों में गिरकर सेवा करने की इच्छा जताई। मातंग ऋषि ने उसकी सच्ची भक्ति देखकर उसे अपने आश्रम में रहने की अनुमति दे दी।
शबरी दिन-रात आश्रम की सेवा करती ,सफाई करती, पानी लाती और ऋषियों की सेवा में लगी रहती। उसकी भक्ति और समर्पण देखकर मातंग ऋषि बहुत प्रसन्न हुए। जब उनके जीवन का अंत समय आया तो उन्होंने शबरी से कहा हे शबरी एक दिन भगवान राम स्वयं तुम्हारे आश्रम में आएंगे तुम उनकी सेवा करना।
इसके बाद शबरी हर दिन भगवान राम के आने की प्रतीक्षा करने लगी। वह रोज जंगल से मीठे मीठे बेर चुनकर लाती और उन्हें चखकर देखती कि कौन सा फल मीठा है, ताकि भगवान को केवल अच्छे फल ही दे सके।
एक दिन भगवान राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ सीता जी की खोज में उस वन में पहुँचे। जब वे शबरी के आश्रम में आए तो शबरी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने प्रेमपूर्वक उनका स्वागत किया और उन्हें बेर खिलाने लगी।
शबरी हर बेर को पहले खुद चखती और फिर राम को देती। यह देखकर लक्ष्मण को थोड़ा संकोच हुआ, लेकिन भगवान राम ने प्रेम से वे बेर खाए और कहा इन बेरों से मीठा कुछ भी नहीं है, क्योंकि इनमें तुम्हारा सच्चा प्रेम और भक्ति है।
भगवान राम ने शबरी की भक्ति से प्रसन्न होकर उसे मोक्ष प्रदान किया। शबरी माता की कथा हमें सिखाती है कि भगवान को बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि सच्चे मन और प्रेम से पाया जा सकता है।
सच्ची भक्ति में जाति, रूप या ज्ञान का कोई महत्व नहीं होता।
प्रेम और समर्पण ही भगवान तक पहुँचने का सबसे सरल मार्ग है।
धैर्य और विश्वास से हर इच्छा पूर्ण होती है।
ये कथा रामायण में वर्णित है।
सपना बबेले स्वरा




