भारतीय शिक्षा प्रणाली: प्राचीन से वर्तमान का सफ़र ‘-डॉ. दक्षा जोशी ‘निर्झरा’ अहमदाबाद, गुजरात।

‘भारतीय शिक्षा प्रणाली: प्राचीन से वर्तमान का सफ़र ‘-डॉ. दक्षा जोशी ‘निर्झरा’
अहमदाबाद, गुजरात।
हमारी प्राचीन शिक्षा प्रणाली अत्यंत समृद्ध थी, जो मानवता के कल्याण हेतु विद्वान इंसानों का निर्माण करती थी। विमान, विद्युत, दूरसंचार, अणु-परमाणु और शल्य चिकित्सा जैसे शब्दों की उपस्थिति इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि हमारे पूर्वजों को इन उन्नत विज्ञानों और तक़नीकों का ज्ञान था। सौरमंडल और ब्रह्मांड के रहस्यों की जानकारी भी उन्हें प्राचीन काल से ही थी।
वर्तमान समय में डिस्टेंस एजुकेशन भारतीय शिक्षा संस्थानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन गई है। यह प्रणाली उन छात्रों के लिए वरदान है जो किसी कारणवश नियमित कक्षाएं लेने में असमर्थ होते हैं। इसके अंतर्गत छात्र पत्र-व्यवहार और ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करते हैं।
दूरस्थ शिक्षा सूचना के स्रोत और शिक्षार्थी के बीच समय और दूरी की बाधा को दूर करती है। इसमें शिक्षक और छात्र को किसी विशेष स्थान पर उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे छात्र न्यूनतम वित्तीय संसाधनों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। इन डिग्रियों और प्रमाणपत्रों का मूल्य नियमित कक्षाओं के समान ही होता है। पंजीकृत विश्वविद्यालय स्नातक और परास्नातक स्तर के पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं, जहाँ निर्धारित पात्रता मानदंडों के आधार पर छात्रों का चयन किया जाता है।
-डॉ. दक्षा जोशी ‘निर्झरा’
अहमदाबाद, गुजरात।




