Uncategorized

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ—पत्रकारिता का महत्व

 

राष्ट्रीय प्रेस दिवस हमारे देश की प्रेस स्वतंत्रता, निष्पक्ष पत्रकारिता और सशक्त लोकतंत्र के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह दिवस न केवल पत्रकारिता के योगदान को याद करने का अवसर है, बल्कि उन सभी पत्रकार बंधुओं को सम्मान देने का भी समय है, जो अपने साहस, निष्ठा और सत्य के प्रति समर्पण के साथ समाज को सही दिशा दिखाते हैं। भारत में लोकतंत्र चार स्तंभों पर आधारित माना गया है—विधानपालिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और प्रेस। इनमें प्रेस को “चौथा स्तंभ” इसलिए कहा जाता है क्योंकि:
पत्रकार समाज का आईना होते हैं। वे घटनाओं, नीतियों और निर्णयों की वास्तविकता जनता तक पहुँचाते हैं, जिससे लोग सही जानकारी के आधार पर मत बना सकें।
पत्रकारिता शासन और प्रशासन पर निगरानी रखती है। भ्रष्टाचार, अन्याय और अनियमितताओं को उजागर कर लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती है।
किसी भी राष्ट्र की दिशा निर्धारित करने में जन-मत का बड़ा योगदान होता है। पत्रकारिता इस जन-मत को मजबूत सूचना और विश्लेषण के आधार पर आकार देती है।
समाज के वंचित, उपेक्षित और शोषित वर्गों की भावनाओं और समस्याओं को आवाज देने का कार्य भी पत्रकारिता का ही है।
स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, नीति-निर्माण—पर संवाद स्थापित कर पत्रकार समाज को जागरूक बनाते हैं।

आज पत्रकारिता का क्षेत्र पहले से अधिक व्यापक, तेज़ और तकनीक-आधारित हो गया है। डिजिटल मीडिया के दौर में जहाँ सूचना तक पहुँच आसान हुई है, वहीं फेक न्यूज़, पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग और दबावों जैसी चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं। ऐसे कठिन दौर में भी पत्रकार अपने कर्तव्य-पथ पर अडिग रहकर सत्य को सामने लाते हैं—यही उनके साहस का प्रमाण है।इस विशेष अवसर पर हम सभी उन पत्रकार साथियों को हार्दिक शुभकामनाएँ देते हैं, जो दिन-रात जनता को सूचित, जागरूक और सशक्त बनाने में जुटे रहते हैं।
आपकी कलम, आपका कैमरा और आपका साहस—ये सभी लोकतंत्र को जीवंत और मजबूत बनाते हैं।
शिक्षाविद् एवं अधिवक्ता दीपक शर्मा

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!