गणतंत्र और देशभक्ति — मंजू शर्मा

एक आम नागरिक की नजर से
गणतंत्र का मतलब है ऐसा देश जहाँ जनता की सरकार होती है। यहाँ राजा-रानी नहीं, बल्कि लोग अपने प्रतिनिधि चुनते हैं और वही मिलकर देश चलाते हैं। हमारी आजादी के बाद संविधान बना और तब से भारत एक गणतंत्र देश है। यहाँ कानून का शासन होता है और सभी को बराबर अधिकार मिलते हैं। चाहे वो अमीर हो, गरीब हो या किसी भी धर्म या भाषा का हो।
देशभक्ति का मतलब अपने देश से अटुट प्रेम करना है।
यह सिर्फ झंडा फहराने या राष्ट्रगान गाने तक सीमित नहीं होता है। बल्कि अपने देश की इज्जत, प्रगति और भलाई के लिए सोचना और काम करना भी देशभक्ति है। ईमानदारी से काम करना, दूसरों का सम्मान करना, और देश की छवि खराब न होने देना,ये सब देशप्रेम ही है।
हम जब गणतंत्र की बात करते हैं, तो सिर्फ अधिकारों की नहीं, कर्तव्यों की भी बात होनी चाहिए । हम देश के नागरिक हैं, इसलिए हमारा कर्तव्य है कि संविधान और कानून का सम्मान करें, ईमानदारी से काम करें, कर चुकाएँ, देश की संपत्ति और स्वच्छता का ध्यान रखें, सबके साथ समान व्यवहार करें और जरूरत पड़ने पर देश की सुरक्षा में खड़े हों। यही अच्छे नागरिक होने की पहचान है।
गणतंत्र हमें अधिकार देता है,
और देशभक्ति हमें कर्तव्य याद दिलाती है।
अगर हम अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी निभाएँ, तो यही असली गणतंत्र है और यही सच्ची देशभक्ति।
मंजू शर्मा
जय हिंद जय भारत
मंजू शर्मा ‘मनस्विनी’




