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देश की दशा और दिशा  — विनोद कुमार शर्मा

गौर करने की बात तो है हमारे सारे के सारे पड़ोसी देश लगभग विकासशील या गरीबी में जीवन यापन को मजबूर हैं जिनको कुछ बड़े देशों के पैसे और निशाना बनाने की कोशिश रणनीति से टार्गेट बना कर अस्थिर करने की कोशिशें लगातार होती रहतीं अफगानिस्तान म्यांमार बांग्लादेश नेपाल मालदीव श्रीलंका को अस्थिरता के दौर से गुजरना पड़ा
वहां नए राजनैतिक परिदृश्य का उदय हुआ श्रीलंका में राजनेताओं की पेंशन पूर्णतः बंद कर दी गई नेपाल में शिक्षा में आमूल परिवर्तन निजी शिक्षा स्कूल बंद सभी के लिए अनिवार्य शिक्षा सिर्फ सरकारी स्कूलों में ही मिलेगी मतलब शिक्षा माफियाओं का अंत ऐसे ठोस कदम हमारे देश में क्यों नहीं क्यों की राजनीति सेवा नहीं व्यापार बन गई है आम आदमी का राजनीति में प्रवेश और सफलता नगण्य है
प्रमुख कारणों में से एक कारण सभी पड़ोसी देश छोटे छोटे और जनसंख्या कम है हमारे देश की जनसंख्या अत्यधिक और बड़ी संख्या में बेरोजगार हैं जो आधुनिकीकरण के कारण मशीनों के उपयोग से रोजगार कम उत्पन्न हो रहे दूसरे जातिगत व्यवस्था अपने चरम पर लोकतन्त्र के लिए घातक साबित हो रही सांप्रदायिक वैमनस्यता भी बढ़ती ही जा रही जो विकास को सकारात्मक विस्तार देने में रोड़ा बनी है जब तक जातीय समीकरणों से चुनाव होते रहेंगे देश का सर्वोच्च विकाश असंभव प्रतीत होता है
सभी को फ्री स्वास्थ शिक्षा और आवास की दिशा और आर्थिक वर्गीकरण से इन दिशाओं और दशाओं में पर्याप्त सुधार की गुंजाइश बरकरार है
विनोद कुमार शर्मा

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