हर सुबह – डॉ सरिता चौहान प्रवक्ता हिंदी

हर सुबह मैं तेरी राह तकती हूं
तकते तकते शाम हो जाती हैं
और मैं खो जाती हूं
कुछ तन्हाई और उदासी साथ रहती हैं
तेरी यादों के लमहे पास रहती है।
तेरी प्यारी सी हंसी और मंद मुस्कान
जो हर पल साथ रहती है
उन लम्हों के सहारे कुछ जी लेती हूं
मीठी मीठी हंसी के सहारे
कुछ उदासी पी लेती हूं
जान है तो जहान है
यह सोचकर जहां में जी लेती हूं
तेरे प्यार के नागमे रोज गुनगुनाती हूं
तेरे इश्क की कली
हृदय के कपाट में रखती हूं
जाने कब तू आ जाए
और कली खिलने लगे
मैं महकने लगूं मैं चहकने लगूं।
इस जहां में खुशबू बिखरने लगूं
अब तो आ जा
क्या कहूं और कैसे कहूं
कि तू बेवफा है
कौन जानता है कि
मुकद्दर ही मुझसे खफा है
ना तेरी खता है ना मेरी खता है
अब तू आ जा और आकर देख
जिंदगी में मजा ही मजा है।
रामभक्त हनुमान आएंगे
तुझे और मुझे मिलाएंगे
तेरे मेरे प्यार की चर्चा होगी हर जगह
ऐसा कुछ वह कर जाएंगे
स्वरचित
डॉ सरिता चौहान
प्रवक्ता हिंदी
पीएम श्री एडी राजकीय कन्या इंटर कॉलेज गोरखपुर उत्तर प्रदेश




