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श्रावण मास में निवाड़ रोड झोटवाड़ा पर हुआ भव्य शिव पार्थिव महारुद्राभिषेक, कलश यात्रा में उमड़ी मातृशक्ति

 

जयपुर। श्रावण मास के पावन अवसर पर जयपुर ज्योतिष शोध संस्थान के तत्वावधान में विवाह पैराडाइस, निवाड़ रोड पर भव्य शिव पार्थिव महारुद्राभिषेक का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ किया गया। धार्मिक आयोजन में हाथोज धाम पीठाधीश्वर स्वामी बालमुकुंदाचार्य महाराज सहित संत-महात्माओं का सान्निध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। कलश यात्रा श्री रघुनाथ जी मंदिर, निवाड़ से प्रारंभ होकर निवाड़ रोड स्थित विवाह पैराडाइस, पेट्रोल पंप के पास आयोजन स्थल तक पहुँची। कलश यात्रा में 1100 मातृशक्ति एवं 151 ध्वजाओं के साथ श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। ज्योतिषाचार्य पंडित धर्मेंद्र शास्त्री के आचार्यत्व में भगवान शिव के पार्थिव स्वरूप का विधि-विधानपूर्वक पूजन एवं महारुद्राभिषेक कराया गया। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं भक्ति के साथ भगवान शिव का जल, दुग्ध एवं विभिन्न पूजन सामग्रियों से अभिषेक कर सुख-समृद्धि एवं लोककल्याण की कामना की।

 

इस अवसर पर हाथोज धाम पीठाधीश्वर स्वामी बालमुकुंदाचार्य महाराज ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का अत्यंत पावन अवसर है। इस प्रकार के धार्मिक आयोजन भगवान शिव-पार्वती की आराधना के साथ-साथ सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं, संस्कार एवं सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने का कार्य करते हैं। उन्होंने पार्थिव शिव पूजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन परंपरा में पार्थिव शिव की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। माता पार्वती ने भी भगवान शिव की प्राप्ति के लिए तप, साधना एवं श्रद्धापूर्वक आराधना की थी। उन्होंने कहा कि भगवान शिव भाव और श्रद्धा के आराध्य हैं, इसलिए प्रत्येक भक्त को पूरी श्रद्धा एवं विश्वास के साथ महादेव का पूजन करना चाहिए।

स्वामी बालमुकुंदाचार्य महाराज ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे नियमित रूप से मंदिरों में दर्शन एवं पूजा-अर्चना करें और भगवान शिव को एक लोटा जल अवश्य अर्पित करें। उन्होंने कहा कि देवाधिदेव महादेव करुणा एवं कृपा के सागर हैं और श्रद्धा-भाव से की गई आराधना भक्त के जीवन में आध्यात्मिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। महादेव सभी की मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाले हैं। आवश्यकता है कि भक्त निष्काम भाव, श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव का स्मरण एवं पूजन करते रहें। श्रावण मास में शिव आराधना, महामृत्युंजय मंत्र, शिवलिंग अभिषेक एवं धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है। आयोजक जयपुर ज्योतिष शोध संस्थान एवं ज्योतिषाचार्य पंडित धर्मेंद्र शास्त्री ने संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं एवं मातृशक्ति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन सनातन धर्म की आध्यात्मिक परंपराओं को जन-जन तक पहुँचाने के साथ समाज में धर्म, संस्कार, श्रद्धा, सेवा एवं समरसता की भावना को मजबूत करते हैं।

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