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प्रदोष काल और स्थिर लग्न का संयोग, 8 नवंबर को मनेगी दीपावली

इस बार छह दिन का होगा दीपोत्सव, 6 नवंबर से शुरू होकर 11 नवंबर को होगा समापन

जयपुर। इस बार तिथियों के घटने-बढ़ने से दीपोत्सव छह दिन का होगा। 6 नवंबर को धनतेरस से पर्वों की शुरुआत होगी। 8 नवंबर को दीपावली, 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर को भाईदूज मनाई जाएगी। प्रतिपदा तिथि के देर से शुरू होने के कारण गोवर्धन पूजा उदयातिथि के अनुसार 10 नवंबर को होगी। पर्वों की तारीखों और पूजा के मुहूर्त पर बने असमंजस को दूर करने के लिए ज्योतिषाचार्यों ने पंचांग की गणना के बाद यह निर्णय लिया है। ज्योतिषाचार्य डॉ. महेंद्र मिश्रा के अनुसार, 8 नवंबर को अमावस्या के साथ प्रदोष काल और स्थिर लग्न का संयोग बन रहा है। इसे लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ माना जाता है।
अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:28 बजे शुरू होगी और 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। ऐसे में 8 नवंबर को अमावस्या रहने के साथ रात में निशीथ काल का संयोग भी मिलेगा। इसी आधार पर 8 नवंबर को दीपावली मनाना उचित माना गया है। पिछले साल 2025 में अमावस्या 20 अक्टूबर को दोपहर 3:44 बजे शुरू हुई थी और 21 अक्टूबर को शाम 5:54 बजे तक रही थी। इस बार तिथि का समय अलग होने से पर्वों के क्रम में बदलाव हुआ है। पंचांग की गणना के आधार पर पूजा और पर्व की तारीख तय करना जरूरी है, ताकि श्रद्धालु सही तिथि पर धार्मिक अनुष्ठान कर सकें।
9 नवंबर दोपहर तक अमावस्या, इस कारण गोवर्धन पूजा नहीं होगी
दीपोत्सव के पर्वों में इस बार तिथियों के संयोग से पूजा-पाठ का क्रम बदलेगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. महेंद्र मिश्रा के अनुसार, 9 नवंबर को दोपहर तक अमावस्या तिथि रहने के कारण गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को उदयातिथि के आधार पर होगी। वहीं, 8 नवंबर को दीपावली पर स्थिर लग्न और सोमवती अमावस्या का संयोग रहेगा। इस दिन स्वाति और विशाखा नक्षत्र भी रहेंगे। लक्ष्मी पूजन के लिए इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
धनतेरस पर हस्त नक्षत्र और शुक्र प्रदोष का संयोग बनेगा। इस दिन सोना-चांदी, वाहन, बर्तन और अन्य सामान खरीदना शुभ माना जाता है। 7 नवंबर को चित्रा नक्षत्र में हनुमानजी की पूजा और संकट निवारण के लिए अनुष्ठान किए जा सकेंगे। पर्वों की श्रृंखला में 10 नवंबर को सिद्ध योग और 11 नवंबर को अनुराधा नक्षत्र के साथ यम द्वितीया का संयोग रहेगा। तिथियों के इस बदलाव के चलते श्रद्धालुओं को पंचांग देखकर पूजा करनी चाहिए।
लक्ष्मी पूजन: 8 नवंबर को शाम 5:54 से 7:50 बजे तक शुभ मुहूर्त
दीपावली पर मां लक्ष्मी की आराधना के लिए इस बार प्रदोष काल और स्थिर लग्न का संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य डॉ. महेंद्र मिश्रा के अनुसार, 8 नवंबर को अमावस्या तिथि के दौरान शाम के समय लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहेगा। वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है। मान्यता है कि इस लग्न में पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल शाम 6:02 से रात 8:34 बजे तक रहेगा। इस अवधि में पूजा करने से प्रदोष काल और स्थिर लग्न के संयोग का लाभ मिलेगा। वहीं, रात्रि में तंत्र साधना और विशेष पूजा करने वालों के लिए निशीथ काल का मुहूर्त रात 11:39 से 12:31 बजे तक रहेगा। पूजा के दौरान स्वच्छता, दीपदान और विधि-विधान का ध्यान रखना चाहिए।
हस्त, चित्रा, स्वाति के साथ विशाखा नक्षत्र का संयोग
इस बार दीपोत्सव के पर्व तिथियों के बदलाव के कारण छह दिनों में मनाए जाएंगे। ज्योतिषाचार्य डॉ. महेंद्र मिश्रा के अनुसार, दीपावली पर हस्त, चित्रा, स्वाति और विशाखा नक्षत्रों का संयोग भी रहेगा। 8 नवंबर को दीपावली के बाद 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक अमावस्या रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शुरू हो जाएगी।
प्रतिपदा तिथि दोपहर में शुरू होने के कारण गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को उदयातिथि के आधार पर की जाएगी। इसके अगले दिन 11 नवंबर को भाईदूज के साथ चित्रगुप्त पूजन होगा। पंचांग की गणना के अनुसार, 6 नवंबर को धनतेरस से शुरू होने वाले दीपोत्सव का समापन 11 नवंबर को होगा। तिथियों और नक्षत्रों के संयोग के चलते इस बार पर्वों की तारीखों में बदलाव हुआ है।
कब कौन-सा पर्व किस तिथि को रहेगा-

*6 नवंबर: धनतेरस*
कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 10:31बजे शुरू होगी और अगले दिन सुबह 10:48 बजे तक रहेगी।

*7 नवंबर: रूप चतुर्दशी*
चतुर्दशी तिथि सुबह 10:48 बजे शुरू होगी और 8 नवंबर को सुबह 11:28 बजे तक रहेगी। इस दिन धन्वंतरि जयंती रूप चतुर्दशी नरक चतुर्दशी निमित्त यमदीप दान श्याम दीपदान श्री हनुमान जन्मोत्सव देशाचार के अनुसार।

*8 नवंबर: दीपावली*
कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि सुबह 11:28 बजे शुरू होगी जो अगले दिन 9 नवंबर को 12:32 तक रहेगी। पंचांगों और शास्त्रों के अनुसार इसी दिन दीपावली होगी।
*9 नवंबर: रामा-श्यामा*
इस दिन देव कार्य अमावस्या सोमवती अमावस्या बलिराज पूजा होगी।इस दिन दीपावली की रामा श्यामा और अति आवश्यकता में प्रातः काल शुभ मुहूर्त में प्रतिष्ठान में लक्ष्मी पूजा हवन इत्यादि कर सकते हैं। अमावस्या तिथि दोपहर 12:32 बजे तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शुरू होगी। अतः जो लोग लोकाचार मानते हैं और रात्रि कालीन पूजा करते हैं वह लोग इस दिन भी गोवर्धन पूजा कर सकते हैं। लेकिन शास्त्र अनुसार 10 नवंबर मंगलवार को ही गोवर्धन पूजा अन्नकूट भोग प्रसादी उद्यत तिथि में प्रातः काल से ही करना चाहिए।
*10 नवंबर: गोवर्धन पूजा*
उदयातिथि के अनुसार गोवर्धन पूजा होगी। प्रतिपदा तिथि दोपहर 2 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है।
*11 नवंबर: भाईदूज*
द्वितीया तिथि दोपहर 3:53 बजे तक रहेगी। इसी दिन भाईदूज का पर्व और चित्रगुप्त पूजन होगा।
इसलिए शास्त्र अनुसार इस वर्ष दीपमहोत्सव, धनत्रयोदशी से लेकर के भाई दूज पर्यंत जो दीपावली का पर्व प्रतिवर्ष पंचदिवसीय होता है वह इस वर्ष षड् दिवसीय होगा।

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