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शीर्षक : संस्कार निबंध शैली — सुमन दूबे साऊंखोर बड़हलगंज गोरखपुर

 

संस्कार मनुष्य के जीवन की अमूल्य धरोहर हैं। संस्कारों से व्यक्ति के चरित्र, व्यवहार और व्यक्तित्व का निर्माण होता है। अच्छे संस्कार हमें बड़ों का सम्मान करना, छोटों से प्रेम करना, सत्य बोलना, अनुशासन में रहना और दूसरों की सहायता करना सिखाते हैं। संस्कारों की पहली पाठशाला हमारा परिवार है। माता-पिता और गुरु अपने आचरण तथा शिक्षा द्वारा बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करते हैं। संस्कारी व्यक्ति समाज में सम्मान प्राप्त करता है और अपने अच्छे व्यवहार से दूसरों के लिए उदाहरण बनता है। आज के आधुनिक युग में शिक्षा और तकनीक के साथ संस्कारों का होना भी अत्यंत आवश्यक है। केवल ज्ञानवान होना पर्याप्त नहीं, बल्कि विनम्र और सदाचारी होना भी जरूरी है। अच्छे संस्कार व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की प्रेरणा देते हैं। इसलिए हमें अपने जीवन में अच्छे संस्कार अपनाने चाहिए और आने वाली पीढ़ी को भी इनका महत्व समझाना चाहिए। संस्कार ही मनुष्य को सच्चे अर्थों में श्रेष्ठ बनाते हैं।

सुमन दूबे साऊंखोर
बड़हलगंज गोरखपुर

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