ग्रामसभा चितहां में आस्था का महासंगम- चउरा बाबा मंदिर पर विशाल हनुमंत महायज्ञ का भव्य आयोजन

अरविंद शर्मा जिला ब्यूरो चीफ नज़र इन्डिया 24
कुशीनगर। जनपद के नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चितहां इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर है। गांव स्थित प्राचीन चउरा बाबा मंदिर परिसर में 12 फरवरी से प्रारंभ हुआ विशाल हनुमंत महायज्ञ पूरे क्षेत्र के लिए आस्था का केंद्र बन गया है। यह महायज्ञ 20 फरवरी तक चलेगा और प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। आठ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान ने न केवल चितहां बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों को भी भक्तिमय वातावरण में डुबो दिया है।
महायज्ञ की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, कलश यात्रा और विधि-विधान से संपन्न पूजन के साथ हुई। प्रथम दिन से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से देर रात तक मंदिर परिसर में “जय श्री राम” और “बजरंग बली की जय” के उद्घोष गूंजते रहते हैं। यज्ञ मंडप को आकर्षक फूल-मालाओं, रंग-बिरंगी झालरों और विद्युत सज्जा से सुसज्जित किया गया है, जो दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। यज्ञशाला में विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ आहुति दी जा रही है, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो उठा है।
इस महायज्ञ का एक प्रमुख आकर्षण अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचिका गौरी गौरांगी द्वारा श्रीमुख से किया जा रहा कथा वाचन है। प्रतिदिन सायंकाल कथा पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। गौरी गौरांगी जी अपने ओजस्वी और मधुर वाणी से रामकथा एवं हनुमंत महिमा का वर्णन करती हैं, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठते हैं। कथा के दौरान भक्ति गीतों और भजनों की प्रस्तुति से वातावरण और भी भक्तिमय हो जाता है। दूर-दूर से आए श्रद्धालु कथा का श्रवण कर अपने जीवन को धन्य मान रहे हैं।
महायज्ञ के अवसर पर विशाल मेले का भी आयोजन किया गया है, जो बच्चों और युवाओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मेले में विभिन्न प्रकार के झूले, विशेषकर गगनचुंबी झूले, बच्चों के लिए रोमांच का कारण बने हुए हैं। खिलौनों, मिठाइयों, सजावटी सामान और ग्रामीण हस्तशिल्प की दुकानें मेले की शोभा बढ़ा रही हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इस आयोजन से बल मिला है, क्योंकि स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों की अच्छी बिक्री हो रही है।
श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे महाप्रसाद की व्यवस्था की गई है, जो पूरे आठ दिनों तक निरंतर चलती रहेगी। भंडारे में प्रतिदिन हजारों लोगों को भोजन कराया जा रहा है। भोजन की व्यवस्था पूरी तरह व्यवस्थित और स्वच्छ तरीके से की गई है। स्वयंसेवक लगातार सेवा में जुटे हुए हैं और श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक प्रसाद ग्रहण करा रहे हैं। दूर-दूर से आए साधु-संतों और सन्यासियों के लिए भी विशेष आवास और भोजन की व्यवस्था की गई है। विभिन्न अखाड़ों और आश्रमों से पधारे संत-महात्मा यज्ञ में भाग लेकर क्षेत्र को आशीर्वाद दे रहे हैं।
इस विशाल धार्मिक आयोजन के मुख्य कर्ताधर्ता शंभू शरण मिश्र जी हैं, जिनकी मेहनत, लगन और समर्पण के कारण यह महायज्ञ संभव हो पाया है। महीनों की तैयारी और सतत प्रयास के बाद इस आयोजन को मूर्त रूप दिया गया। शंभू शरण मिश्र जी ने बताया कि यह आयोजन क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामवासियों के सहयोग और सामूहिक प्रयास के बिना इतना बड़ा आयोजन संभव नहीं था।
विशेष उल्लेखनीय बात यह है कि इस महायज्ञ में क्षेत्र के सभी लोगों ने आर्थिक और शारीरिक रूप से बढ़-चढ़कर योगदान दिया है। किसी ने धन से सहयोग किया तो किसी ने श्रमदान देकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। युवाओं की टोली ट्रैफिक व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण में लगी हुई है, वहीं महिलाएं प्रसाद वितरण और साफ-सफाई में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। यह आयोजन सामाजिक एकता और सामूहिक शक्ति का अद्भुत उदाहरण बन गया है।
सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है। पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ स्वयंसेवकों की टीम लगातार निगरानी कर रही है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। चिकित्सा सहायता के लिए प्राथमिक उपचार केंद्र भी बनाया गया है, जहां आवश्यकता पड़ने पर तत्काल इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इतने भव्य स्तर पर हनुमंत महायज्ञ का आयोजन पहले कभी नहीं हुआ। इस आयोजन ने चितहां गांव को एक नई पहचान दी है। आसपास के जिलों और दूर-दराज क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस आयोजन की जानकारी व्यापक रूप से फैल रही है, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
महायज्ञ के अंतिम दिन पूर्णाहुति और विशाल भंडारे का विशेष आयोजन किया जाएगा, जिसमें और भी अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। आयोजकों ने सभी भक्तों से अनुरोध किया है कि वे अनुशासन बनाए रखें और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करें।
कुल मिलाकर, चितहां गांव का यह विशाल हनुमंत महायज्ञ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सामूहिक सहभागिता और आस्था का जीवंत उदाहरण बन गया है। भक्ति, सेवा और सहयोग की भावना से ओतप्रोत यह आयोजन आने वाले वर्षों तक क्षेत्रवासियों की स्मृतियों में अंकित रहेगा।




