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आंदोलनों का दौर – विनोद कुमार शर्मा

आंदोलन किसी भी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में जन मानस को अपनी राय या व्यवस्था से व्यथित असंतुष्ट होने के कारण अपना पक्ष सार्वजनिक करने का रूप होता है सरकारों का कर्तव्य आंदोलन का कारण जान समस्या का निवारण होना चाहिए लेकिन उसपर सिर्फ वोट का नफा नुकसान देखकर उसे दबाना या और हवा देना आजकल व्यवस्था का अंग बन गया
आजादी पाने के दौर में आंदोलनों का वृहद इतिहास है हालांकि सिर्फ आंदोलन से नहीं क्रांति आत्म बलिदान अदम्य साहस से सशस्त्र विद्रोह आजादी पाने का प्रमुख जरिया बना।
उसके बाद देश में आपातकाल के विरोध में जे पी आंदोलन ने देश की दिशा बदली फिर बहुत दिनों बाद अन्ना हजारे के आंदोलन ने देश को झकझोर दिया लेकिन उसका फायदा राजनैतिक रूप में दूसरों ने उठाया अभी हाल में सीजेपी आंदोलन ने देश का ध्यान खींचा बड़ा आंदोलन हुआ लेकिन जेन जी के साथ असामाजिक तत्वों ने आंदोलन के उद्देश्य और प्रारूप पर सवालिया निशान लगाया
अब एक नया आरक्षण रिफॉर्म आंदोलन चल रहा जिस विषय पर कोई सरकार कोई पार्टी बात ही नहीं करना चाहती वोट बैंक खोने के डर से लगातार एक वर्ग को खुश करने के चक्कर में दूसरे को प्रताड़ित किया जा रहा जातिगत आरक्षण से देश में सामाजिक समरसता एकता अखंडता सौहार्द विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा जो भविष्य के लिए घातक होगा ।
विनोद कुमार शर्मा

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